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PM Awas Gramin List Bihar: 11,18,937 घरों की मंज़ूरी, नाम ऐसे देखें; नाम कटने की शर्तों में अब फ्रिज-बाइक नहीं
केंद्र ने 20 अगस्त 2026 को बिहार के लिए 11,18,937 पक्के घरों की मंज़ूरी का ऐलान किया। नाम योजना की वेबसाइट पर अपनी ID से दिखता है; ID न हो, तो पंचायत का नोटिस बोर्ड देखें या प्रखंड दफ़्तर में पूछें।

बिहार में PM आवास योजना–ग्रामीण (PMAY-G) की कोई अलग “नई लिस्ट 2026” योजना की सरकारी वेबसाइट पर 15 अक्टूबर 2026 की रात तक हमें नहीं मिली। अपना नाम देखने के लिए रजिस्ट्रेशन नंबर, आवास+ ID या SECC वाली PMAY ID चाहिए। कोई नंबर नहीं है, तो गाइडलाइन के मुताबिक़ पक्की हुई वेटिंग लिस्ट (स्थायी प्रतीक्षा सूची) ग्राम पंचायत के नोटिस बोर्ड पर लगती है, और घर मंज़ूरी का आदेश प्रखंड (ब्लॉक) दफ़्तर से लिया जा सकता है।
PIB के 20 अगस्त 2026 के बयान के मुताबिक़ केंद्र ने बिहार के लिए 11,18,937 पक्के घरों की मंज़ूरी का ऐलान किया। PIB के 3 दिसंबर 2024 के बयान के मुताबिक़ नए चरण में नाम कटने की शर्तों से मोटर वाला दोपहिया, मछली पकड़ने की नाव, लैंडलाइन फ़ोन और फ्रिज हटे हैं। नवंबर 2025 के पत्र के मुताबिक़ अब 10 शर्तें हैं, और पक्का घर या 2 से ज़्यादा कमरे हों, तब भी नाम हटाने के लिए चुना जाता है।
ज़रूरी फ़ैक्ट्स
सभी आंकड़े जाँचे गए:
- बिहार के लिए मंज़ूरी (PIB, 20 अगस्त 2026)
- 11,18,937 पक्के घरों की मंज़ूरी और ₹13,427 करोड़ का आवंटन; पत्र मुख्यमंत्री को सौंपा गया। PIB ने इसे ‘मंज़ूरी’ कहा है; ‘लक्ष्य’ शब्द योजना की MIS रिपोर्ट का है
- आवास+ 2024 के लक्ष्य की MIS रिपोर्ट
- बिहार का ‘MoRD Target’ 11,18,937; 13 राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों का जोड़ 31,71,635 (रिपोर्ट पर तारीख़ नहीं; 14 अक्टूबर 2026 को देखी)
- बिहार में 2016 से, आवास+ 2024 के बिना (MIS)
- 49,09,798 घर मंज़ूर, 43,01,356 पूरे; मंत्रालय का लक्ष्य 49,20,346 (14 अक्टूबर 2026, शाम 7:33 की रिपोर्ट; रिपोर्ट के नोट के मुताबिक़ इसमें आवास+ 2024 की प्रगति शामिल नहीं)
- पुरानी दोनों लिस्ट (लोकसभा, 12 अगस्त 2025)
- झारखंड, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और कर्नाटक को छोड़कर सभी राज्यों में SECC 2011 और आवास+ 2018 की लिस्ट के सभी हक़दार परिवार कवर (बिहार इन चार में नहीं); नए परिवारों के लिए आवास+ 2024 सर्वे
- आवास+ 2024 सर्वे का समय
- 27 दिसंबर 2024 से; पहले 31 मार्च 2025 तक, फिर सभी राज्यों के लिए 30 अप्रैल 2025 और 15 मई 2025 तक (मंत्रालय का नवंबर 2025 का पत्र)
- सर्वे का पोर्टल (मंत्रालय का 15 मई 2025 का पत्र)
- 8 राज्यों (असम, महाराष्ट्र, नागालैंड, गोवा, ओडिशा, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, तेलंगाना) को 31 मई 2025 तक; बाक़ी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए पोर्टल 16 मई 2025 से अगले आदेश तक बंद; बिहार इन 8 में नहीं
बाक़ी 19 फ़ैक्ट्स, सोर्स के साथ
- सर्वे के बाद जाँच (SOP, 27 दिसंबर 2024)
- हर सेल्फ़-सर्वे का मिलान पंचायत का सर्वेयर करता है, पर वह किसी का नाम हटा नहीं सकता; चेकर 10% मामले देखता है (जहाँ सबूत जानकारी से मेल नहीं खाता, वहाँ 100%), BDO 5% (मेल न खाने पर कम से कम 10%) और ज़िले का अधिकारी 2%; फिर ग्राम सभा और अपील कमेटी
- नाम कटने की शर्तें (आवास+ 2024 सर्वे, नवंबर 2025 का पत्र)
- पक्का घर या 2 से ज़्यादा कमरे; मोटर वाला तिपहिया/चारपहिया; तीन या चार पहिए वाली खेती की मशीन; ₹50,000 या ज़्यादा लिमिट का किसान क्रेडिट कार्ड; सरकारी कर्मचारी; सरकार में रजिस्टर्ड ग़ैर-खेती कारोबार; किसी की कमाई ₹15,000 महीने से ज़्यादा; इनकम टैक्स; प्रोफ़ेशनल टैक्स; 2.5 एकड़ या ज़्यादा सिंचाई वाली, या 5 एकड़ या ज़्यादा बिना सिंचाई की ज़मीन
- हटाई गई शर्तें (PIB, 3 दिसंबर 2024)
- कैबिनेट की मंज़ूरी से मशीन वाला दोपहिया, मशीन वाली मछली पकड़ने की नाव, लैंडलाइन फ़ोन और फ्रिज की शर्तें हटाईं; कमाई की सीमा ₹10,000 से बढ़ाकर ₹15,000 महीना; ज़मीन की शर्तें आसान; बाहर करने की कुल 10 शर्तें
- 2022 की लिस्ट में था, अब नहीं
- मोटर वाला दोपहिया, मोटर वाली मछली पकड़ने की नाव, फ्रिज, लैंडलाइन फ़ोन; कमाई की सीमा तब ₹10,000 महीना; 7.5 एकड़ वाली शर्त (2022 की गाइडलाइन, Annexure-I)
- अपने आप शामिल (2022 की गाइडलाइन)
- बेघर, भीख पर गुज़ारा करने वाले, हाथ से मैला ढोने वाले, आदिम जनजाति (PVTG), क़ानूनी तौर पर छुड़ाए गए बंधुआ मज़दूर
- घर के लिए मदद
- ₹1.20 लाख मैदानी इलाक़े में; ₹1.30 लाख दुर्गम इलाक़ों और IAP ज़िलों में
- बिहार के 11 IAP ज़िले (बिहार सरकार, जेंडर बजट 2024-25)
- अरवल, औरंगाबाद, गया, जमुई, जहानाबाद, कैमूर, मुंगेर, नवादा, पश्चिम चंपारण, रोहतास और सीतामढ़ी: ₹1.30 लाख; बाक़ी ज़िलों में ₹1.20 लाख; पैसा तीन किस्तों में
- किस्तें और समय (गाइडलाइन)
- कम से कम 3; पहली मंज़ूरी पर, आदेश के 7 कामकाजी दिनों में; दूसरी नींव या कुर्सी (प्लिंथ) पर; तीसरी खिड़की, लिंटल या छत की ढलाई पर; स्तर और रकम राज्य तय करता है; घर मंज़ूरी से 12 महीने में पूरा करना
- बिहार, 2026-27 की किस्तें (MIS, 14 अक्टूबर 2026)
- खाते में पैसा पहुँचना कन्फ़र्म: पहली किस्त 34,602 परिवार (₹13,841 लाख), दूसरी 2,72,258 परिवार (₹1,08,914.9 लाख), तीसरी 3,56,600 परिवार (₹1,42,632.4 लाख); चौथी किस्त 0
- हर किस्त औसतन (हमारा हिसाब)
- क़रीब ₹40,000: ऊपर की रकम ÷ परिवारों की गिनती, तीनों किस्तों में; यह औसत है, नियम नहीं
- घर के साथ और मदद (गाइडलाइन)
- 90 दिन की मज़दूरी (दुर्गम इलाक़ों और IAP ज़िलों में 95 दिन); शौचालय ₹12,000 (स्वच्छ भारत मिशन–ग्रामीण, मनरेगा या दूसरे सोर्स से); शौचालय बनने के बाद ही घर पूरा माना जाता है
- नया क़ानून (VB-G RAM G, सवाल-जवाब 11 मई 2026)
- 1 जुलाई 2026 से मनरेगा की जगह; PMAY-G के घर का 90/95 दिन का काम इसमें भी लिया जा सकता है (FAQ: “लागू गाइडलाइन के मुताबिक़”)
- बिहार की मज़दूरी दर
- ₹300 रोज़, 1 जुलाई 2026 से (S.O. 3518(E), 30 जून 2026)
- मज़दूरी का जोड़ (हमारा हिसाब)
- 90 × ₹300 = ₹27,000; 95 × ₹300 = ₹28,500 (ज़्यादा से ज़्यादा; काम करने पर ही)
- लिस्ट पर शिकायत (गाइडलाइन)
- लिस्ट पंचायत में कम से कम 7 दिन; फिर 15 दिन में शिकायत BDO या तय अधिकारी को; ज़िले की 3 सदस्यों वाली अपील कमेटी
- बिहार लोक शिकायत
- टोल-फ़्री 1800 345 6284 (रोज़ सुबह 9:30 से शाम 6:30 बजे); PM आवास की शिकायत प्रखंड विकास पदाधिकारी के स्तर पर (21 जनवरी 2025 की लिस्ट)
- नाम देखने के पेज (PMAY-G)
- रजिस्ट्रेशन नंबर या लाभार्थी ID (9 से 60 अक्षर); आवास+ ID (9 अंक); SECC की PMAY ID (7 अंक, साथ में राज्य); किस्त के लिए FTO नंबर या PFMS ID; हर पेज पर कैप्चा
- AwaasApp का OTP (ऐप की मैनुअल)
- रजिस्ट्रेशन ID से जुड़े मोबाइल पर आता है; 10 मिनट में ख़त्म
- साइबर ठगी
- 1930 या cybercrime.gov.in
क्या बिहार की नई PM आवास लिस्ट जारी हुई है?
योजना की वेबसाइट पर “नई लिस्ट जारी” जैसा कोई नोटिस हमें 14 अक्टूबर 2026 की शाम और 15 अक्टूबर 2026 की रात नहीं मिला। PMAY-G के होम पेज के सबसे नए 10 सर्कुलर (सबसे नया 23 सितंबर 2026 का) नई लिस्ट के बारे में नहीं हैं।
PIB के 20 अगस्त 2026 के बयान के मुताबिक़ ग्रामीण विकास मंत्री ने बिहार के लिए 11,18,937 पक्के घरों की मंज़ूरी और ₹13,427 करोड़ के आवंटन (अलग रखी गई रकम) का ऐलान किया। PIB ने इसे ‘मंज़ूरी’ कहा है, ‘लक्ष्य’ नहीं। योजना की MIS (रिपोर्टों की वेबसाइट) की “AwaasPlus 2024 Target Report” में बिहार के आगे यही 11,18,937 ‘MoRD Target’ (मंत्रालय का लक्ष्य) लिखा है। लोकसभा के 11 फ़रवरी 2025 के जवाब के मुताबिक़ मंत्रालय राज्यों को लक्ष्य देता है, और हक़दार परिवारों के घर मंज़ूर करना राज्य का काम है।
MIS की 14 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक़ बिहार में योजना के तहत 2016 से अब तक 49,09,798 घर मंज़ूर हुए हैं और 43,01,356 पूरे; रिपोर्ट के नोट के मुताबिक़ इसमें आवास+ 2024 की प्रगति शामिल नहीं है। लोकसभा के 12 अगस्त 2025 के जवाब के मुताबिक़ झारखंड, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और कर्नाटक को छोड़कर सभी राज्यों (बिहार समेत) में SECC 2011 और आवास+ 2018 की लिस्टों के सभी हक़दार परिवार कवर हो चुके हैं।
लिस्ट में अपना नाम कैसे देखें?
पहले देखिए कि आपके पास कौन-सा नंबर है। योजना की वेबसाइट के ये पेज एक नंबर और एक कैप्चा (छोटा जोड़ या अक्षर) माँगते हैं:
- घर मंज़ूर हो चुका है: “IAY/PMAYG Beneficiary” पेज पर रजिस्ट्रेशन नंबर या लाभार्थी ID डालें। पेज के मुताबिक़ यह 9 से 60 अक्षर का होता है।
- आवास+ सर्वे में नाम लिखा गया था: “AwaasPlus Beneficiary Details” पेज पर राज्य चुनें और 9 अंकों की आवास+ ID डालें।
- SECC 2011 वाली लिस्ट में नाम था: “SECC Family Member Details” पेज पर राज्य चुनें और 7 अंकों की PMAY ID डालें।
- किस्त का पैसा कहाँ अटका है: “FTO Tracking” पेज पर FTO (फ़ंड ट्रांसफ़र ऑर्डर) नंबर या PFMS ID डालें। ये आपके पास न हों, तो प्रखंड दफ़्तर से पूछें।
कोई नंबर नहीं है, तो पंचायत के नोटिस बोर्ड पर वेटिंग लिस्ट देखें या प्रखंड दफ़्तर में पूछें। 2022 की गाइडलाइन के मुताबिक़ घर मंज़ूर होने पर SMS भी आता है। अधिकारियों के नंबर और ईमेल PMAY-G वेबसाइट के ‘Officials Directory’ पेज पर हैं।
मोबाइल पर AwaasApp भी है, जिसकी लिंक PMAY-G वेबसाइट पर है। ऐप की यूज़र मैनुअल के मुताबिक़ ‘Beneficiary Login’ में रजिस्ट्रेशन ID, मोबाइल नंबर, आधार नंबर या मनरेगा जॉब कार्ड नंबर से लॉग इन होता है; OTP उसी मोबाइल पर आता है जो रजिस्ट्रेशन ID से जुड़ा है।
आवास+ 2024 में जिन्होंने ख़ुद सर्वे किया था, उनके लिए सर्वे की SOP के मुताबिक़ सर्वेयर की जाँच (पुष्टि) का नतीजा SMS से आएगा, और ऐप में उनके सेल्फ़-सर्वे लॉग इन में भी दिखेगा।
कई वेबसाइटें “Beneficiary details for verification” रिपोर्ट से गाँव की लिस्ट निकालना बताती हैं, पर वह रिपोर्ट योजना की रिपोर्टों की लिस्ट में नहीं है, और उसके पते और ‘Social audit report’ लिंक पर 15 अक्टूबर 2026 की रात “पेज नहीं मिला” लिखा आया।
आवास+ 2024 सर्वे के बाद अब क्या होगा?
मंत्रालय के 15 मई 2025 के पत्र के मुताबिक़ सिर्फ़ 8 राज्यों को 31 मई 2025 तक और समय मिला, और बाक़ी राज्यों के लिए आवास+ 2024 सर्वे का पोर्टल 16 मई 2025 से “अगले आदेश तक” बंद हुआ। बिहार उन 8 में नहीं है। बाद में कुछ राज्यों को अलग पत्रों से और समय मिला, 2026 में पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़ और असम को भी; बिहार का ऐसा पत्र हमें नहीं मिला।
इसलिए हमारी जानकारी में बिहार में सर्वे बंद है, पर यह पक्का नहीं: PMAY-G वेबसाइट पर अब भी ‘AwaasPlus Survey’ का लिंक है, और ‘Am I Eligible?’ के सवाल पूरे करने वालों को आवास+ 2024 वाले पेज पर भेजा जाता है।
सर्वे दो तरह से हुआ: परिवार ने ख़ुद ऐप से किया, या पंचायत के सर्वेयर ने। मंत्रालय की 27 दिसंबर 2024 की SOP के मुताबिक़ परिवार में कोई महिला हो, तो लाभार्थी महिला को ही चुना जाना था।
SOP और मंत्रालय के पत्रों के मुताबिक़ नाम पक्का होने से पहले ये क़दम हैं:
- पंचायत का सर्वेयर हर सेल्फ़-सर्वे की मौके पर जाँच करता है, पर SOP के मुताबिक़ वह किसी का नाम हटा नहीं सकता।
- 21 मई 2025 के पत्र के मुताबिक़ चेकर गाँव जाकर सिस्टम के शक वाले सभी मामले देखते हैं; SOP के मुताबिक़ इनके अलावा चेकर 10%, BDO 5% और ज़िले का अधिकारी 2% मामले चुनकर देखते हैं।
- नवंबर 2025 के पत्र के मुताबिक़ हक़दार (पात्र) न पाए गए परिवारों का नाम हटाने की सिफ़ारिश BDO करते हैं, और मंज़ूरी ज़िले में ADM या ज़िला परिषद के CEO देते हैं; यह काम 30 नवंबर 2025 तक पूरा करना था।
- फिर लिस्ट ग्राम सभा में जाती है, और ज़िले की अपील कमेटी (अपीलीय समिति) उसे देखती है। SOP के मुताबिक़ आख़िरी मंज़ूरी इसी कमेटी के बाद मिलती है।
- गाइडलाइन के मुताबिक़ हर साल हर पंचायत को जितना लक्ष्य मिलता है, उतने परिवार वेटिंग लिस्ट में सबसे ऊपर से चुने जाते हैं।
बिहार की आवास+ 2024 लिस्ट इनमें से किस क़दम तक पहुँची है, यह हमें किसी सरकारी रिपोर्ट में नहीं मिला। रिपोर्टों की ‘AwaasPlus’ वेटिंग लिस्टें 2018 वाले सर्वे की हैं।
किन बातों पर नाम कटता है, और 2022 से क्या बदला?
नवंबर 2025 के पत्र के मुताबिक़ आवास+ 2024 सर्वे की जाँच में तीन तरह के परिवार हटाने के लिए चुने जाते हैं: जिनका घर पक्का है (पक्की दीवार या पक्की छत), जिनके घर में 2 से ज़्यादा कमरे हैं, और जिन पर इन 10 में से कोई शर्त लागू होती है:
- मोटर वाला तिपहिया या चारपहिया वाहन;
- तीन या चार पहिए वाली खेती की मशीन;
- ₹50,000 या उससे ज़्यादा लिमिट वाला किसान क्रेडिट कार्ड;
- परिवार में कोई सरकारी कर्मचारी;
- सरकार में रजिस्टर्ड, खेती के अलावा कोई कारोबार;
- परिवार में किसी की कमाई ₹15,000 महीने से ज़्यादा;
- इनकम टैक्स देना;
- प्रोफ़ेशनल टैक्स देना;
- 2.5 एकड़ या उससे ज़्यादा सिंचाई वाली ज़मीन;
- 5 एकड़ या उससे ज़्यादा बिना सिंचाई की ज़मीन।
2022 की गाइडलाइन में ऐसी 13 शर्तें थीं। तब मोटर वाला दोपहिया, मोटर वाली मछली पकड़ने की नाव, फ्रिज और लैंडलाइन फ़ोन होने पर भी परिवार बाहर होता था, और कमाई की सीमा ₹10,000 महीना थी। PIB के 3 दिसंबर 2024 के बयान के मुताबिक़ कैबिनेट की मंज़ूरी से ये चार चीज़ें हटीं और कमाई की सीमा ₹15,000 हुई। नवंबर 2025 के पत्र में भी ये चार चीज़ें नहीं हैं।
पर PIB के 19 नवंबर 2024 के एक नोट की “बाहर होने वालों” की लिस्ट में फ्रिज और लैंडलाइन फ़ोन अब भी लिखे हैं, जबकि उसी नोट के मुताबिक़ शर्तें 13 से घटकर 10 हुई हैं। ‘Am I Eligible?’ के सवालों में भी फ्रिज, लैंडलाइन, दोपहिया और नाव का सवाल नहीं है।
दो बातों पर सरकारी पेज मेल नहीं खाते। पहली, सिंचाई वाली ज़मीन: पत्र और PIB के 3 दिसंबर 2024 के बयान में सिंचाई की मशीन की बात नहीं है, पर ‘Am I Eligible?’ सवालों में “2.5 acres or more with at least 1 irrigation equipment” है, जैसा 2022 की गाइडलाइन में था। दूसरी, कमरे: पत्र में “Number of rooms exceed 2” है, सवालों में “more than 2 rooms with a pucca roof”। ‘पक्की’ दीवार या छत का मतलब हमें किसी सरकारी पेज पर नहीं मिला।
2022 की गाइडलाइन में पाँच तरह के परिवार ‘अपने आप शामिल’ हैं: बेघर, भीख पर गुज़ारा करने वाले, हाथ से मैला ढोने वाले, आदिम जनजाति (PVTG) और क़ानूनी तौर पर छुड़ाए गए बंधुआ मज़दूर। नवंबर 2025 के पत्र में इनके लिए अलग से कुछ नहीं लिखा।
आपके घर में जो-जो है, उसे नीचे आँगन में टैप करके देखिए कि दोनों लिस्टों में उसका क्या हिसाब है।
एक घर के लिए कितना पैसा मिलता है?
मैदानी इलाक़े में घर के लिए ₹1.20 लाख मिलते हैं, और दुर्गम (जहाँ घर बनाना महँगा पड़ता है) इलाक़ों और IAP ज़िलों में ₹1.30 लाख, गाइडलाइन और ‘About Us’ पेज के मुताबिक़। बिहार सरकार के वित्त विभाग के जेंडर बजट 2024-25 के मुताबिक़ बिहार के 11 IAP ज़िले अरवल, औरंगाबाद, गया, जमुई, जहानाबाद, कैमूर, मुंगेर, नवादा, पश्चिम चंपारण, रोहतास और सीतामढ़ी हैं; वहाँ ₹1.30 लाख मिलते हैं, बाक़ी ज़िलों में ₹1.20 लाख, और पैसा तीन किस्तों में आता है। यह 2024 का डॉक्यूमेंट है; नई लिस्ट और बिहार के दुर्गम इलाक़ों की लिस्ट हमें नहीं मिली।
वेबसाइट के मुताबिक़ पैसा किस्तों में, सीधे बैंक या डाकघर खाते में आता है। गाइडलाइन के मुताबिक़ पहली किस्त मंज़ूरी के आदेश के 7 कामकाजी दिनों में आनी चाहिए, और घर मंज़ूरी से 12 महीने में पूरा होना चाहिए। गाइडलाइन के मुताबिक़ घर महिला के नाम पर, या पति-पत्नी के साझा नाम पर दिया जाता है।
बिहार में हर किस्त कितनी है और किस स्तर पर आती है, यह तय करने वाला राज्य का आदेश हमें नहीं मिला। MIS की किस्तों वाली रिपोर्ट से हमारा हिसाब: 2026-27 में 14 अक्टूबर 2026 तक बिहार में पहली किस्त 34,602 परिवारों के खाते में पहुँची, हर एक को औसतन क़रीब ₹40,000; दूसरी और तीसरी का औसत भी यही है, चौथी किस्त के कॉलम में 0 है।
गाइडलाइन में घर के पैसे के अलावा दो और मदद हैं। पहली, घर बनाने में 90 दिन की मज़दूरी (दुर्गम इलाक़ों और IAP ज़िलों में 95 दिन)। सरकार के 11 मई 2026 के सवाल-जवाब (FAQ) के मुताबिक़ 1 जुलाई 2026 से मनरेगा की जगह VB-G RAM G क़ानून आया, और PMAY-G के घर का यह काम उसमें भी लिया जा सकता है, “लागू गाइडलाइन के मुताबिक़”। 30 जून 2026 के नोटिफ़िकेशन के मुताबिक़ बिहार में 1 जुलाई 2026 से मज़दूरी ₹300 रोज़ है, यानी पूरे 90 दिन काम हो तो ₹27,000 (हमारा हिसाब); यह काम करने पर ही मिलती है।
दूसरी, 2022 की गाइडलाइन के मुताबिक़ शौचालय के लिए ₹12,000, स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण), मनरेगा या किसी और सोर्स से। उसी गाइडलाइन के मुताबिक़ शौचालय बनने के बाद ही घर पूरा माना जाता है।
घर के स्तर और किस्तों का मतलब क्या है, और किस्त कब आती है?
घर के सात स्तर हैं, और किस्तें इन्हीं से जुड़ी हैं। गाइडलाइन के मुताबिक़ ये हैं: मंज़ूरी (Sanction), नींव (Foundation), कुर्सी (Plinth), खिड़की तक (Windowsill), लिंटल (Lintel), छत की ढलाई (Roof cast) और पूरा (Completed)। नाम वाले पेज कैप्चा माँगते हैं और हमने कोई फ़ॉर्म नहीं भरा, इसलिए उनके नतीजे में कौन-से शब्द आते हैं, यह हम नहीं बता सकते।
गाइडलाइन के मुताबिक़ किस्तें कम से कम 3 होती हैं: पहली मंज़ूरी पर, दूसरी नींव या कुर्सी के स्तर पर, और तीसरी खिड़की, लिंटल या छत की ढलाई पर। कौन-सा स्तर और हर किस्त कितनी, यह राज्य साल की शुरुआत में तय करता है; MIS की किस्त-स्तर वाली रिपोर्ट में 2026-27 के लिए बिहार की लाइन नहीं थी, इसलिए बिहार के चुने स्तर हमें नहीं मिले।
हर स्तर पर घर की जियो-टैग फ़ोटो (जगह और समय के साथ) AwaasApp से ली जाती है, और गाइडलाइन के मुताबिक़ अगली किस्त इन्हीं जाँचों से जुड़ी है। गाइडलाइन के मुताबिक़ फ़ोटो लाभार्थी या उसकी तरफ़ से कोई और भी भेज सकता है; पर ऐप की मैनुअल में फ़ोटो भेजना सिर्फ़ ‘Inspection Login’ (जाँच करने वाले के लॉग इन) में दिखाया गया है।
आपका घर कहाँ तक बना है और कितनी किस्तें आईं, यह नीचे टैप कीजिए।
नाम नहीं है या ग़लत कटा, तो शिकायत कहाँ करें?
गाइडलाइन के मुताबिक़ शिकायत प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) या राज्य के तय अधिकारी को दी जाती है। गाइडलाइन के मुताबिक़ ग्राम सभा से पास लिस्ट पंचायत में कम से कम 7 दिन लगती है, और उसके बाद 15 दिन तक शिकायत दी जा सकती है, अगर किसी का नाम तय तरीक़े के बिना हटा या उसका क्रम बदला। गाइडलाइन के मुताबिक़ जाँच रिपोर्ट ज़िले की तीन सदस्यों वाली अपील कमेटी के पास जाती है।
उसी गाइडलाइन के मुताबिक़ कोई हक़दार परिवार ग़लती से हट जाए, तो राज्य उसे वापस जोड़ने का प्रस्ताव मंत्रालय को भेज सकता है; केंद्र के पोर्टल CPGRAMS (pgportal.gov.in) पर भी शिकायत हो सकती है।
बिहार में ‘बिहार लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम’ के तहत भी शिकायत (परिवाद) दी जा सकती है। इसकी 21 जनवरी 2025 तक की लिस्ट में ‘प्रधानमंत्री आवास योजना से संबंधित परिवाद’ है, जिसकी सुनवाई प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) के स्तर पर होती है। परिवाद lokshikayat.bihar.gov.in पर ऑनलाइन, या अनुमंडल या ज़िला दफ़्तर में दिया जा सकता है। वेबसाइट के मुताबिक़ टोल-फ़्री नंबर 1800 345 6284 पर रोज़ सुबह 9:30 से शाम 6:30 बजे तक कॉल किया जा सकता है।
सर्वे से छूटे परिवार अब नया नाम कैसे जुड़वाएँ, इसका कोई रास्ता हमें गाइडलाइन, SOP, मंत्रालय के पत्रों या सर्कुलर में नहीं मिला। ऊपर के रास्ते नाम हटने, क्रम बदलने या काम में देरी की शिकायत के हैं।
ठगी से कैसे बचें?
शक तब करें, जब कोई लिस्ट में नाम जुड़वाने, किस्त जल्दी दिलाने या जाँच में नाम बचाने के लिए पैसे माँगे। गाइडलाइन, आवास+ 2024 की SOP और नवंबर 2025 के पत्र में हमें किसी फ़ीस की बात नहीं मिली, और किसी एजेंट का ज़िक्र नहीं है।
सर्वे की SOP के मुताबिक़ जाँच में जानकारी ग़लत निकली, तो परिवार ज़िम्मेदार होगा और उस पर कार्रवाई हो सकती है, इसलिए किसी के कहने पर ग़लत जानकारी न भरवाएँ। ऐप सिर्फ़ PMAY-G वेबसाइट की लिंक से लें: AwaasApp की लिंक होम पेज पर है, आवास+ 2024 सर्वे ऐप की आवास+ वाले पेज पर। SOP में लिखा पुराना पता pmayg.nic.in 14 अक्टूबर 2026 को खुला ही नहीं।
AwaasApp का OTP, और बैंक, UPI या आधार का OTP किसी को न बताएँ। स्कीम समाचार आपसे कोई जानकारी या पैसा नहीं माँगता। ठगी हो जाए, तो 1930 पर फ़ोन करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत करें। ऐप या रजिस्ट्रेशन की दिक़्क़त के लिए PMAY-G का ईमेल support-pmayg@gov.in है, किस्त के पेमेंट (FTO) की दिक़्क़त के लिए PFMS का helpdesk-pfms@gov.in; दोनों ‘Contact Us’ पेज पर हैं।
ख़ुद कहाँ जाँचें?
- योजना की वेबसाइट: pmayg.dord.gov.in और report.pmayg.dord.gov.in।
- बिहार के आंकड़े: शुरू से अब तक और आवास+ 2024 का लक्ष्य।
- नियम: 2022 की गाइडलाइन, आवास+ 2024 की SOP, नवंबर 2025 का पत्र और PIB का 3 दिसंबर 2024 का बयान।
- शिकायत: बिहार लोक शिकायत और CPGRAMS; साइबर ठगी: cybercrime.gov.in या 1930।
सोर्स
- PIB, 20 अगस्त 2026 (हिंदी): बिहार के लिए 11 लाख 18 हजार 937 पक्के मकानों की मंज़ूरी, ₹13,427 करोड़ का आवंटनप्रेस रिलीज़ · तारीख़ 20 अगस्त 2026 · जाँचा गया 15 अक्टूबर 2026
- PIB, 20 अगस्त 2026 (अंग्रेज़ी): 11.19 Lakh Pucca Houses Approved for Biharप्रेस रिलीज़ · तारीख़ 20 अगस्त 2026 · जाँचा गया 15 अक्टूबर 2026
- PMAY-G MIS: AwaasPlus 2024 Target Report (बिहार 11,18,937)आंकड़े / रिपोर्ट · जाँचा गया 15 अक्टूबर 2026
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- PMAY-G MIS: B.2 Unit assistance and installment details, 2026-27 (बिहार की लाइन नहीं)आंकड़े / रिपोर्ट · तारीख़ 14 अक्टूबर 2026 · जाँचा गया 15 अक्टूबर 2026
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- बिहार सरकार, वित्त विभाग: जेंडर बजट 2024-25 (ग्रामीण विकास विभाग, PMAY-G: 11 IAP ज़िले, तीन किस्तें)आंकड़े / रिपोर्ट · PDF · जाँचा गया 15 अक्टूबर 2026
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