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PM Kusum Yojana Jharkhand: सोलर पंप पर किसान का हिस्सा ₹5,000 से ₹10,000, पर पोर्टल पर नया रजिस्ट्रेशन अभी बंद

JREDA के ब्रोशर में 2, 3 और 5 HP पंप पर किसान का हिस्सा ₹5,000, ₹7,000 और ₹10,000 है। 14 अक्टूबर 2026 को झारखंड के PM-KUSUM पोर्टल पर नया रजिस्ट्रेशन फ़िलहाल बंद था।

PM Kusum Yojana Jharkhand: सोलर पंप पर किसान का हिस्सा ₹5,000 से ₹10,000, पर पोर्टल पर नया रजिस्ट्रेशन अभी बंद
AI से बनी तस्वीर · PM Kusum Yojana Jharkhand: सोलर पंप पर किसान का हिस्सा ₹5,000 से ₹10,000, पर पोर्टल पर नया रजिस्ट्रेशन अभी बंद · चित्र: स्कीम समाचार

झारखंड में पीएम-कुसुम (PM-KUSUM) योजना से खेत में सोलर पंप लगवाने पर किसान को पंप की क़ीमत का बहुत छोटा हिस्सा देना होता है। झारखंड रिन्यूएबल एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी (JREDA) के ब्रोशर के मुताबिक़ 2 HP पंप पर किसान का हिस्सा ₹5,000, 3 HP पर ₹7,000 और 5 HP पर ₹10,000 है। ब्रोशर इन पंपों की पूरी क़ीमत ₹1.80 लाख, ₹2.16 लाख और ₹3.18 लाख बताता है। ब्रोशर के मुताबिक़ बाक़ी पैसा राज्य सरकार (71-72%) और केंद्र सरकार (लगभग 25%) देती हैं।

लेकिन अभी पोर्टल पर नया आवेदन नहीं हो सकता। झारखंड के PM-KUSUM पोर्टल के रजिस्ट्रेशन पेज पर 14 अक्टूबर 2026 की शाम और 15 अक्टूबर 2026 को रात 12 बजे के बाद, दोनों बार लिखा था कि "पंजीकरण सेवा फिलहाल अस्थायी रूप से बंद है"। यह फिर कब खुलेगा, पोर्टल पर नहीं लिखा। MNRE यानी केंद्र का नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय। उसके 28 अगस्त 2025 के ऑर्डर के मुताबिक़ केंद्र की मदद के लिए 31 दिसंबर 2025 के बाद कंपोनेंट B (अलग से चलने वाले सोलर पंप) में कोई नया वर्क ऑर्डर नहीं दिया जाएगा। इसलिए अभी जो वेबसाइट, कॉल या मैसेज "रजिस्ट्रेशन" के नाम पर पैसा माँगे, उससे सावधान रहें।

ज़रूरी फ़ैक्ट्स

सभी आंकड़े जाँचे गए:

किसान का हिस्सा (JREDA का ब्रोशर)
2 HP पंप पर ₹5,000, 3 HP पर ₹7,000, 5 HP पर ₹10,000; ब्रोशर में पूरी क़ीमत ₹1.80 लाख, ₹2.16 लाख और ₹3.18 लाख; ब्रोशर पर तारीख़ नहीं छपी है
सोर्स: pmkusum.jharkhand.gov.in · 14 अक्टूबर 2026 तक की जानकारी
बाक़ी पैसा कौन देता है (ब्रोशर)
राज्य सरकार 71-72%, केंद्र लगभग 25%; किसानों को 96-97% सब्सिडी (अनुदान); इसी हिस्से में पंप लगाना और 5 साल का रख-रखाव
सोर्स: pmkusum.jharkhand.gov.in · 14 अक्टूबर 2026 तक की जानकारी
शर्तें (ब्रोशर)
पानी का सोर्स (बोरिंग, कुआँ, तालाब) ज़रूरी; खेत में पहले से बिजली हो तो नहीं; एक परिवार को एक ही पंप; पहले किसी योजना से सोलर पंप लिया हो तो नहीं; पंप "प्रथम आओ प्रथम पाओ" के आधार पर
सोर्स: pmkusum.jharkhand.gov.in · 14 अक्टूबर 2026 तक की जानकारी
पंप और पैनल (ब्रोशर की टेबल)
बोरिंग पर सबमर्सिबल पंप: 2 HP के लिए 1800 वाट और बोरिंग कम-से-कम 4 इंच, 3 HP के लिए 3000 वाट और कम-से-कम 4 इंच, 5 HP के लिए 4800 वाट और कम-से-कम 6 इंच; कुआँ, तालाब, नहर पर सरफ़ेस पंप: 2 HP 1800, 3 HP 2700, 5 HP 4800 वाट
सोर्स: pmkusum.jharkhand.gov.in · 14 अक्टूबर 2026 तक की जानकारी
ब्रोशर में पंपों की गिनती
"अब तक झारखंड ने 40,000 से अधिक सोलर पम्पसेट" लगाए, लगभग 100 MW
सोर्स: pmkusum.jharkhand.gov.in · 14 अक्टूबर 2026 तक की जानकारी
नया रजिस्ट्रेशन (झारखंड का पोर्टल)
"पंजीकरण सेवा फिलहाल अस्थायी रूप से बंद है"; 14 अक्टूबर 2026 की शाम और 15 अक्टूबर 2026 को रात 12 बजे के बाद देखा; फिर खुलने की तारीख़ नहीं लिखी
सोर्स: pmkusum.jharkhand.gov.in
बाक़ी 17 फ़ैक्ट्स, सोर्स के साथ
हिस्सा जमा करने की आख़िरी तारीख़ (पोर्टल के अपडेट)
31 जनवरी 2026; तब तक न देने पर आवेदन अपने-आप रद्द (10 और 15 मई 2026 की तारीख़ वाले अपडेट; ये तारीख़ें 31 जनवरी 2026 के बाद की हैं, और पोर्टल ने वजह नहीं बताई)
सोर्स: pmkusum.jharkhand.gov.in · 14 अक्टूबर 2026 तक की जानकारी
केंद्र का कट-ऑफ़ (MNRE, 28 अगस्त 2025)
कंपोनेंट B में केंद्र की मदद सिर्फ़ उन प्रोजेक्ट को जिनका वर्क ऑर्डर या NTP 31 दिसंबर 2025 तक जारी हुआ; उसके बाद नया वर्क ऑर्डर नहीं; योजना की आख़िरी तारीख़ (sunset date) 31 मार्च 2026
सोर्स: apipmk.mnre.gov.in · 28 अगस्त 2025 तक की जानकारी
काम पूरा करने की मोहलत (MNRE, 28 मार्च 2026)
31 दिसंबर 2025 तक जारी ऑर्डर वाले प्रोजेक्ट 31 मार्च 2027 तक; PM KUSUM 2.0 तब "प्रस्ताव के स्तर" पर
सोर्स: apipmk.mnre.gov.in · 28 मार्च 2026 तक की जानकारी
आगे मोहलत नहीं (MNRE, 28 सितंबर 2026)
31 मार्च 2027 के बाद काम पूरा करने की कोई मोहलत नहीं
सोर्स: apipmk.mnre.gov.in · 28 सितंबर 2026 तक की जानकारी
समय-सीमा बढ़ी (लोकसभा, 29 जुलाई 2026)
"implementation timeline" सभी कंपोनेंट के लिए 31 मार्च 2027 तक बढ़ाई गई; किन प्रोजेक्ट पर, यह जवाब में नहीं लिखा
सोर्स: sansad.in
देश भर का नियम (राष्ट्रीय पोर्टल के सवाल-जवाब)
केंद्र 30%, राज्य 30%, किसान 40%, बेंचमार्क या टेंडर क़ीमत (जो कम हो) पर; उत्तर-पूर्व, हिमाचल, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और द्वीपों में केंद्र 50%; पंप 7.5 HP तक
सोर्स: pmkusum.mnre.gov.in · 14 अक्टूबर 2026 तक की जानकारी
किसे प्राथमिकता (MNRE की गाइडलाइन, 17 जनवरी 2024)
छोटे और सीमांत किसान और माइक्रो इरिगेशन करने वाले; डार्क ज़ोन में नए पंप नहीं; वेंडर 5 साल का रख-रखाव देगा, चोरी और प्राकृतिक आपदा के बीमे के साथ
सोर्स: apipmk.mnre.gov.in · 14 अक्टूबर 2026 तक की जानकारी
डॉक्यूमेंट (राष्ट्रीय पोर्टल पर झारखंड की 'How To Apply' फ़ाइल; फ़ाइल के नाम में 13.10.2022, उस पर तारीख़ नहीं छपी)
ज़मीन की लगान रसीद; पते का सबूत (आधार, वोटर ID या राशन कार्ड); आवेदक किसान के दस्तख़त; फ़ोटो
सोर्स: pmkusum.mnre.gov.in · 14 अक्टूबर 2026 तक की जानकारी
स्टेटस और शिकायत (झारखंड का पोर्टल)
"Application Services" मेन्यू में Track Application, Application Status और Complaint Registration; आवेदन नंबर या रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से
सोर्स: pmkusum.jharkhand.gov.in · 14 अक्टूबर 2026 तक की जानकारी
JREDA का फ़ोन (पोर्टल का कॉन्टैक्ट पेज)
+91-651-2490070 / 2490072; ईमेल info@jreda.com
सोर्स: pmkusum.jharkhand.gov.in · 14 अक्टूबर 2026 तक की जानकारी
झारखंड में पंप (लोकसभा, 12 अगस्त 2026)
31 जुलाई 2026 तक कंपोनेंट B में 86,985 मंज़ूर, 74,201 लगे; कंपोनेंट A और C में 0
सोर्स: sansad.in · 31 जुलाई 2026 तक की जानकारी
झारखंड में पंप (राष्ट्रीय पोर्टल का राज्यवार डेटा)
30 सितंबर 2026 तक 83,599 लगे (86,985 मंज़ूर में से)
सोर्स: pmkusum.mnre.gov.in · 30 सितंबर 2026 तक की जानकारी
झारखंड में पंप (झारखंड के पोर्टल का Achievement पेज)
14 अक्टूबर 2026 की तारीख़ के साथ 65,406 पंप, 135.09 मेगावाट
सोर्स: pmkusum.jharkhand.gov.in · 14 अक्टूबर 2026 तक की जानकारी
फ़र्ज़ी वेबसाइटों पर MNRE की चेतावनी (दोनों पोर्टल पर)
फ़र्ज़ी वेबसाइट और मोबाइल ऐप पंजीकरण शुल्क और पंप की क़ीमत ऑनलाइन माँगते हैं; मिसाल: kusumyojanaonline.in.net, pmkisankusumyojana.co.in, onlinekusamyojana.org.in, pmkisankusumyojana.com
सोर्स: pmkusum.mnre.gov.in · 14 अक्टूबर 2026 तक की जानकारी
फ़र्ज़ी मंज़ूरी पत्र (आकाशवाणी समाचार, 8 सितंबर 2024)
PIB की फ़ैक्ट चेक यूनिट: ₹8,000 "रजिस्ट्रेशन फ़ीस" माँगने वाला पीएम-कुसुम का मंज़ूरी पत्र फ़र्ज़ी
सोर्स: newsonair.gov.in · 8 सितंबर 2024 तक की जानकारी
PM-KUSUM टोल-फ़्री नंबर (MNRE)
1800-180-3333
सोर्स: pmkusum.mnre.gov.in · 14 अक्टूबर 2026 तक की जानकारी
साइबर ठगी की शिकायत
1930 या cybercrime.gov.in
सोर्स: cybercrime.gov.in

आपके खेत के पानी, बिजली और आवेदन के हाल के हिसाब से नीचे देखिए कि JREDA का ब्रोशर आपके लिए कौन-सा पंप लिखता है, आपका हिस्सा कितना है, और अभी क्या करना है।

आपके खेत के लिए कौन-सा सोलर पंप, कितना हिस्सा, और अभी क्या करें?

टूल की जानकारी पढ़ें

यह टूल छह बातें पूछता है: खेत में पानी कहाँ से आता है (बोरिंग, कुआँ, तालाब या नहर) और बोरिंग कितनी चौड़ी है, खेत तक बिजली है या नहीं, परिवार को पहले कोई सोलर पंप मिला है या नहीं, कितने HP का पंप चाहिए, झारखंड के PM-KUSUM पोर्टल पर आवेदन का हाल, और किसी ने फ़ीस माँगी या नहीं। JREDA के ब्रोशर के मुताबिक़ किसान का हिस्सा 2 HP पर ₹5,000, 3 HP पर ₹7,000 और 5 HP पर ₹10,000 है (ब्रोशर में पूरी क़ीमत ₹1.80 लाख, ₹2.16 लाख और ₹3.18 लाख); बाक़ी राज्य सरकार (71-72%) और केंद्र (लगभग 25%) देते हैं। ब्रोशर पर तारीख़ नहीं छपी है। बोरिंग पर सबमर्सिबल पंप लगता है (2 और 3 HP के लिए बोरिंग कम-से-कम 4 इंच, 5 HP के लिए 6 इंच), कुएँ, तालाब या नहर पर सरफ़ेस पंप। पानी का सोर्स ज़रूरी है; जिन खेतों में पहले से बिजली है, या जिन्होंने पहले किसी योजना से सोलर पंप लिया है, उनके लिए यह पंप नहीं। 14 अक्टूबर 2026 को पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन फ़िलहाल बंद था, और MNRE के 28 अगस्त 2025 के ऑर्डर के मुताबिक़ केंद्र की मदद के लिए कंपोनेंट B में 31 दिसंबर 2025 के बाद कोई नया वर्क ऑर्डर नहीं दिया जाएगा। आवेदन किया हो तो पोर्टल के Application Services में Track Application या Application Status देखें; शिकायत Complaint Registration में या JREDA को 0651-2490070 / 2490072 पर। पोर्टल के अपडेट में हिस्सा 31 जनवरी 2026 तक न देने पर आवेदन रद्द होना लिखा है, पर वे अपडेट उस तारीख़ के बाद के हैं और पोर्टल ने वजह नहीं बताई। कोई फ़ीस माँगे तो न दें; बैंक या UPI का OTP और PIN किसी को न बताएँ; ठगी हो जाए तो 1930 या cybercrime.gov.in; MNRE टोल-फ़्री 1800-180-3333। आप जो टैप करते हैं, वह कहीं सेव या भेजा नहीं जाता।

Sources जाँचे गए: 15 अक्टूबर 2026

क्या झारखंड में अभी सोलर पंप के लिए आवेदन हो सकता है?

नहीं। झारखंड के PM-KUSUM पोर्टल पर, जहाँ आवेदन होता है, रजिस्ट्रेशन बंद है। 15 अक्टूबर 2026 को रात 12 बजे के बाद, जब हमने आख़िरी बार देखा, तब भी बंद था। पोर्टल के रजिस्ट्रेशन पेज के मुताबिक़ वहाँ "रखरखाव एवं विकास का कार्य" चल रहा है, और यह काम, उसकी टेस्टिंग और वेरिफ़िकेशन पूरा होने के बाद रजिस्ट्रेशन फिर शुरू होगा। उसी पोर्टल के होम पेज पर 20 मई 2026 की तारीख़ वाले एक अपडेट में लिखा है कि सभी ज़िलों के किसानों के लिए रजिस्ट्रेशन खुला है। पोर्टल के ये दो पेज अलग बात कहते हैं; रजिस्ट्रेशन वाला पेज इसे बंद बताता है, और वहाँ फ़ॉर्म नहीं खुलता।

केंद्र के ऑर्डर भी देखिए। MNRE के 28 अगस्त 2025 के ऑर्डर में योजना की आख़िरी तारीख़ (sunset date) 31 मार्च 2026 लिखी है। उसी ऑर्डर के मुताबिक़ कंपोनेंट B में केंद्र की मदद सिर्फ़ उन प्रोजेक्ट को मिलेगी जिनका वर्क ऑर्डर या NTP (काम शुरू करने का नोटिस) 31 दिसंबर 2025 तक जारी हो गया। MNRE के 28 मार्च 2026 के ऑर्डर के मुताबिक़ ऐसे प्रोजेक्ट 31 मार्च 2027 तक पूरे किए जा सकते हैं। 28 सितंबर 2026 के ऑर्डर के मुताबिक़ इसके आगे कोई मोहलत नहीं मिलेगी। लोकसभा में 29 जुलाई 2026 को दिए जवाब के मुताबिक़ योजना का "implementation timeline" सभी कंपोनेंट के लिए 31 मार्च 2027 तक बढ़ा है। उसमें यह नहीं लिखा कि यह किन प्रोजेक्ट पर लागू है; MNRE के 28 मार्च 2026 के ऑर्डर के मुताबिक़ यह उन्हीं प्रोजेक्ट पर है जिनका NTP 31 दिसंबर 2025 तक जारी हुआ।

28 मार्च 2026 के ऑर्डर में एक नई योजना, PM KUSUM 2.0, का ज़िक्र है। उस ऑर्डर के मुताबिक़ वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग ने बताया था कि पुरानी योजना में जिन कामों का पैसा देना तय हो चुका है, वे PM KUSUM 2.0 में जाएँगे। उसी ऑर्डर के मुताबिक़ यह नई योजना तब "प्रस्ताव के स्तर" (proposal stage) पर थी। MNRE के PM-KUSUM पोर्टल की डॉक्यूमेंट लिस्ट में 14 अक्टूबर 2026 की शाम सबसे नया ऑर्डर 28 सितंबर 2026 का था, और उसमें PM KUSUM 2.0 का ज़िक्र नहीं है। 31 दिसंबर 2025 के बाद झारखंड के पोर्टल पर हुए रजिस्ट्रेशन का क्या होगा, यह हमें किसी सरकारी पेज पर नहीं मिला।

पीएम-कुसुम में क्या मिलता है: कंपोनेंट B और C क्या हैं?

पीएम-कुसुम (प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान) में किसानों के सोलर पंप के दो हिस्से हैं। MNRE की 17 जनवरी 2024 की गाइडलाइन के मुताबिक़ कंपोनेंट B उन इलाक़ों के लिए है जहाँ ग्रिड की बिजली नहीं है। वहाँ अलग से चलने वाला नया सोलर पंप लगता है, या पुराने डीज़ल पंप की जगह सोलर पंप। इसी गाइडलाइन के मुताबिक़ केंद्र की मदद 7.5 HP तक के पंप पर मिलती है; इससे बड़ा पंप लगे, तो भी मदद 7.5 HP वाले पंप जितनी ही रहती है।

कंपोनेंट C में खेत के बिजली से चलने वाले पंप को सोलर से जोड़ा जाता है। गाइडलाइन के मुताबिक़ बची हुई बिजली किसान बिजली कंपनी को बेच सकता है। तीसरा हिस्सा, कंपोनेंट A, किसानों की ज़मीन पर 2 मेगावाट तक के सोलर प्लांट का है।

लोकसभा में 12 अगस्त 2026 को दिए जवाब के मुताबिक़ 31 जुलाई 2026 तक झारखंड में कंपोनेंट A और कंपोनेंट C, दोनों में कुछ भी मंज़ूर नहीं था। यानी उस तारीख़ तक झारखंड के सारे पंप कंपोनेंट B के थे।

किसान को कितना पैसा देना होता है, और बाक़ी कौन देता है?

झारखंड में किसान को पंप के साइज़ के हिसाब से एक तय रकम देनी होती है। JREDA के ब्रोशर के मुताबिक़:

  • 2 HP पंप: किसान का हिस्सा ₹5,000; पूरी क़ीमत ₹1.80 लाख
  • 3 HP पंप: किसान का हिस्सा ₹7,000; पूरी क़ीमत ₹2.16 लाख
  • 5 HP पंप: किसान का हिस्सा ₹10,000; पूरी क़ीमत ₹3.18 लाख

ब्रोशर के मुताबिक़ राज्य सरकार 71-72% और केंद्र लगभग 25% देता है, और किसानों को 96-97% सब्सिडी (अनुदान) पर पंप दिए जा रहे हैं। ब्रोशर यह भी कहता है कि इसी हिस्से में पंप की सप्लाई, उसे लगाना और पाँच साल तक रख-रखाव शामिल है। MNRE की गाइडलाइन के मुताबिक़ वेंडर को पाँच साल का रख-रखाव (AMC) देना है, जिसमें प्राकृतिक आपदा और चोरी का बीमा भी है।

यह ब्रोशर कितना पुराना है? उस पर तारीख़ नहीं छपी है; पोर्टल के डॉक्यूमेंट पेज पर उसके आगे "Updated 2024" लिखा है। ब्रोशर में झारखंड के 40,000 से अधिक पंप और लगभग 100 MW लिखे हैं, जबकि पोर्टल का Achievement पेज 14 अक्टूबर 2026 को 65,406 पंप और 135.09 मेगावाट बताता है। इस फ़र्क़ से अंदाज़ा है कि ब्रोशर कुछ महीने पुराना है। किसान का हिस्सा तय करने वाला राज्य सरकार का आदेश हमें नहीं मिला। हिस्सा आवेदन के वक़्त पोर्टल या JREDA के फ़ोन पर पक्का कर लें।

देश भर का नियम अलग है। राष्ट्रीय PM-KUSUM पोर्टल के सवाल-जवाब के मुताबिक़ ज़्यादातर राज्यों में केंद्र 30% और राज्य 30% देते हैं, और बाक़ी 40% किसान लगाता है; यह प्रतिशत बेंचमार्क या टेंडर क़ीमत, जो कम हो, पर लगता है। उत्तर-पूर्व, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और द्वीपों में केंद्र 50% देता है; झारखंड इनमें नहीं है। गाइडलाइन के मुताबिक़ राज्य को कम-से-कम 30% देना है; झारखंड के ब्रोशर में राज्य का हिस्सा 71-72% लिखा है।

ब्रोशर में केंद्र का हिस्सा "लगभग 25%" लिखा है, जबकि केंद्र के नियम में 30% है। नियम का 30% बेंचमार्क या टेंडर क़ीमत, जो कम हो, उस पर गिना जाता है; ब्रोशर अपना प्रतिशत किस क़ीमत पर गिनता है, यह उसमें नहीं लिखा।

कौन हक़दार (पात्र) है, और किस पानी के लिए कौन-सा पंप?

JREDA के ब्रोशर में ये शर्तें हैं:

  • किसान के पास पानी का सोर्स, जैसे बोरिंग, कुआँ या तालाब, होना ज़रूरी है।
  • जिन किसानों के खेत में बिजली की सुविधा पहले से है, वे इस योजना का फ़ायदा नहीं ले सकते।
  • एक किसान परिवार को एक से ज़्यादा सोलर पंप नहीं मिल सकता।
  • जो किसान किसी दूसरी योजना से पहले ही सोलर पंप ले चुके हैं, वे इसका फ़ायदा नहीं ले सकते।

ब्रोशर के मुताबिक़ पंप "प्रथम आओ प्रथम पाओ" के आधार पर मिलता है। MNRE की गाइडलाइन कहती है कि छोटे और सीमांत किसानों को, और माइक्रो इरिगेशन (टपक या फव्वारे वाली सिंचाई) करने वालों को प्राथमिकता, यानी पहले मौक़ा, मिलेगी। लोकसभा में 18 मार्च 2026 को दिए जवाब के मुताबिक़ केंद्रीय भूजल बोर्ड ने जिन इलाक़ों को डार्क ज़ोन घोषित किया है, वहाँ नए पंप नहीं लगते। डार्क ज़ोन यानी वह इलाक़ा जहाँ ज़मीन के नीचे का पानी ज़रूरत से ज़्यादा निकाला जा चुका है। उसी जवाब के मुताबिक़ वहाँ पुराना डीज़ल पंप तभी सोलर पंप में बदला जा सकता है, जब किसान माइक्रो इरिगेशन से पानी बचाए।

पानी का सोर्स तय करता है कि पंप कैसा होगा। ब्रोशर की टेबल के मुताबिक़ बोरिंग पर सबमर्सिबल पंप लगता है: 2 और 3 HP के लिए बोरिंग कम-से-कम 4 इंच चौड़ी हो, और 5 HP के लिए कम-से-कम 6 इंच। कुएँ, तालाब या नहर पर सरफ़ेस पंप लगता है।

MNRE की गाइडलाइन के मुताबिक़ पंप का साइज़ इलाक़े में पानी के स्तर, ज़मीन और सिंचाई के लिए ज़रूरी पानी के हिसाब से चुना जाता है। राष्ट्रीय PM-KUSUM पोर्टल के मुताबिक़ पंप लगाने से पहले साइट सर्वे होता है, और साइट ठीक हो तो पंप लगता है।

आवेदन कैसे होता है, और कौन-से डॉक्यूमेंट लगते हैं?

आवेदन झारखंड के सरकारी PM-KUSUM पोर्टल, pmkusum.jharkhand.gov.in, पर होता है, जब रजिस्ट्रेशन खुला हो। JREDA के ब्रोशर के मुताबिक़ किसान इसी पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करता है, अपने हिस्से (लाभार्थी अंशदान) के पैसे के साथ, और उसे Acknowledgement slip मिलती है। लोकसभा में 12 अगस्त 2026 को दिए जवाब के मुताबिक़ किसानों का चुनाव राज्य के पोर्टल से राज्य की एजेंसी करती है; MNRE का राष्ट्रीय पोर्टल योजना पर नज़र रखने के लिए है।

डॉक्यूमेंट की लिस्ट हमें नए पोर्टल पर नहीं मिली, क्योंकि रजिस्ट्रेशन बंद होने से फ़ॉर्म नहीं खुलता। MNRE के राष्ट्रीय पोर्टल पर झारखंड के लिए "How To Apply" फ़ाइल में ये डॉक्यूमेंट लिखे हैं। उस फ़ाइल पर तारीख़ नहीं छपी है; उसके नाम में 13.10.2022 लिखा है:

  • ज़मीन की लगान रसीद (Land Lagaan Rasid)
  • पते का सबूत: आधार कार्ड, वोटर ID या राशन कार्ड
  • आवेदक किसान के दस्तख़त
  • आवेदन करने वाले की फ़ोटो

यह फ़ाइल पुरानी है; इसमें लिखा पेज अब "Page Not Found" दिखाता है। रजिस्ट्रेशन खुलने पर पोर्टल पर लिखी लिस्ट ही मानें।

जो किसान रजिस्ट्रेशन करा चुके थे, उनके लिए पोर्टल के होम पेज पर दो अपडेट हैं। 10 मई 2026 की तारीख़ वाले अपडेट के मुताबिक़ जिन किसानों ने रजिस्ट्रेशन कराया पर हिस्सा नहीं दिया, या जिन्हें आवेदन संख्या नहीं मिली, उनके लिए आख़िरी तारीख़ 31 जनवरी 2026 तय की गई है। 15 मई 2026 की तारीख़ वाले अपडेट के मुताबिक़ तय तारीख़ तक हिस्सा जमा न करने पर आवेदन अपने-आप पूरी तरह रद्द (Reject) हो जाएगा। मई 2026 के अपडेट में जनवरी 2026 की आख़िरी तारीख़ क्यों है, यह पोर्टल पर नहीं बताया गया। इसलिए हम यह नहीं कह सकते कि यह नियम आज भी लागू है; अपना हाल Application Status में देखें।

आवेदन किया है तो स्टेटस कैसे देखें, और शिकायत कहाँ करें?

झारखंड के PM-KUSUM पोर्टल पर सबसे ऊपर "Application Services" मेन्यू में "Track Application", "Application Status", "Pay Farmer Share", "Download Receipt", "Payment Enquiry" और "Complaint Registration" हैं। स्टेटस आवेदन नंबर या रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से दिखता है। पोर्टल के सबसे नीचे वाला "Applications Status" लिंक 14 अक्टूबर 2026 की शाम "Page Not Found" दिखा रहा था, इसलिए ऊपर वाला मेन्यू इस्तेमाल करें।

पंप न लगा हो, चल न रहा हो, या पेमेंट या डॉक्यूमेंट में दिक़्क़त हो, तो पोर्टल के Complaint Registration पेज पर शिकायत होती है। पोर्टल के कॉन्टैक्ट पेज पर JREDA का फ़ोन +91-651-2490070 / 2490072 और ईमेल info@jreda.com लिखा है। उसी पेज पर ज़िलों के नोडल अफ़सरों की लिस्ट है, पर 15 अक्टूबर 2026 को उसमें सभी 24 ज़िलों के आगे नाम और नंबर की जगह "-" था।

पंप लग चुका है, तो MNRE की गाइडलाइन के मुताबिक़ पंप या कंट्रोलर पर आसानी से दिखने वाली जगह हेल्पलाइन नंबर लिखा होना चाहिए। उसी गाइडलाइन के मुताबिक़ जहाँ वेंडर का काम चल रहा हो, वहाँ हर ज़िले में (या कई ज़िलों के लिए मिलाकर) उसका एक सर्विस सेंटर होना चाहिए। झारखंड के पोर्टल की Service Center Report में ज़िलेवार सर्विस सेंटर और उनके फ़ोन नंबर हैं।

जिनका काम पहले से चल रहा है, उनके लिए यह जानकारी है। MNRE के 28 मार्च 2026 के ऑर्डर के मुताबिक़ जिन प्रोजेक्ट का वर्क ऑर्डर (NTP) 31 दिसंबर 2025 तक जारी हुआ, उन्हें 31 मार्च 2027 तक पूरा करने का समय है। MNRE के 25 मई 2026 के पत्र के मुताबिक़ यह मोहलत योजना के सभी हिस्सों पर लागू है।

झारखंड में अब तक कितने पंप लगे?

इसका एक जवाब नहीं है, क्योंकि सरकारी पेजों के आंकड़े आपस में मेल नहीं खाते। लोकसभा में 12 अगस्त 2026 को दिए जवाब के मुताबिक़ झारखंड के लिए कंपोनेंट B में 86,985 पंप मंज़ूर हैं, और 31 जुलाई 2026 तक 74,201 लग चुके थे। MNRE के राष्ट्रीय पोर्टल के राज्यवार डेटा में 30 सितंबर 2026 तक 83,599 पंप लगे दिखाए गए हैं।

पर झारखंड के अपने पोर्टल के Achievement पेज पर 14 अक्टूबर 2026 की तारीख़ के साथ 65,406 लगे पंप (135.09 मेगावाट) लिखे हैं। पोर्टल पर रखे JREDA के ब्रोशर में "अब तक झारखंड ने 40,000 से अधिक" पंप लिखे हैं। कौन-सी गिनती सही है, यह किसी पेज पर नहीं बताया गया।

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फ़र्ज़ी वेबसाइट और फ़ीस वाले मैसेज कैसे पहचानें?

MNRE ने चेतावनी दी है कि कई फ़र्ज़ी वेबसाइट और मोबाइल ऐप पीएम-कुसुम के नाम पर सोलर पंप के लिए ऑनलाइन फ़ॉर्म भरवाते हैं। MNRE की चेतावनी के मुताबिक़ वे "पंजीकरण शुल्क" (रजिस्ट्रेशन फ़ीस) और पंप की क़ीमत भी ऑनलाइन माँगते हैं। यह चेतावनी राष्ट्रीय PM-KUSUM पोर्टल और झारखंड के पोर्टल, दोनों पर है। उसमें मिसाल के तौर पर ये पते लिखे हैं: www.kusumyojanaonline.in.net, www.pmkisankusumyojana.co.in, www.onlinekusamyojana.org.in और www.pmkisankusumyojana.com। MNRE की सलाह है कि ऐसी वेबसाइटों पर न जाएँ और कोई पेमेंट न करें। उसी चेतावनी के मुताबिक़ यह योजना राज्य सरकार के विभाग चलाते हैं।

आकाशवाणी समाचार की 8 सितंबर 2024 की खबर के मुताबिक़ PIB की फ़ैक्ट चेक यूनिट ने बताया था कि ठग लोगों को पीएम-कुसुम का नक़ली "मंज़ूरी पत्र" भेजकर ₹8,000 "रजिस्ट्रेशन फ़ीस" माँग रहे थे। उसी खबर के मुताबिक़ सरकार ने उस पत्र को फ़र्ज़ी बताया।

पहचानने का तरीक़ा: झारखंड का सरकारी पोर्टल pmkusum.jharkhand.gov.in है और MNRE का pmkusum.mnre.gov.in; दोनों के पते gov.in पर ख़त्म होते हैं। 14 अक्टूबर 2026 को झारखंड के पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन बंद था, इसलिए अभी "रजिस्ट्रेशन" या "मंज़ूरी" के नाम पर पैसा माँगने वाला हर मैसेज शक के लायक़ है। ब्रोशर के मुताबिक़ किसान का हिस्सा पोर्टल पर ऑनलाइन, आवेदन के साथ जमा होता है। ब्रोशर में किसी अलग "रजिस्ट्रेशन फ़ीस" की बात नहीं है।

स्कीम समाचार आपसे कोई जानकारी या पैसा नहीं माँगता। अपना आधार, बैंक या मोबाइल नंबर सिर्फ़ सरकारी पोर्टल पर भरें। बैंक या UPI का OTP और PIN किसी को न बताएँ। झारखंड के पोर्टल के लॉगिन बॉक्स में भी "Get OTP" है। वह OTP सिर्फ़ तब डालें जब आप ख़ुद pmkusum.jharkhand.gov.in खोलकर लॉगिन कर रहे हों, और फ़ोन, मैसेज या लिंक पर किसी को न बताएँ। ठगी हो जाए तो 1930 पर फ़ोन करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत करें। योजना की जानकारी के लिए MNRE का टोल-फ़्री नंबर 1800-180-3333 है (राष्ट्रीय पोर्टल का कॉन्टैक्ट पेज)।

ख़ुद कहाँ जाँचें?

इन सरकारी पेजों पर:

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