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UP Cashless Health Card: लिस्टेड प्राइवेट अस्पताल में ₹5 लाख तक, सरकारी में बिना सीमा, सिर्फ़ भर्ती पर

लिस्टेड प्राइवेट अस्पताल में ₹5 लाख की सीमा पूरे परिवार की है, हर साल के लिए। कार्ड sects.up.gov.in पर बनता है; DDO या कोषाधिकारी की मंज़ूरी के बाद NHA के पोर्टल पर आधार e-KYC से डाउनलोड होता है।

UP Cashless Health Card: लिस्टेड प्राइवेट अस्पताल में ₹5 लाख तक, सरकारी में बिना सीमा, सिर्फ़ भर्ती पर
AI से बनी तस्वीर · UP Cashless Health Card: लिस्टेड प्राइवेट अस्पताल में ₹5 लाख तक, सरकारी में बिना सीमा, सिर्फ़ भर्ती पर · चित्र: स्कीम समाचार

उत्तर प्रदेश के राज्य कर्मचारियों, पेंशनरों और उनके परिवार का कैशलेस हेल्थ कार्ड ‘पंडित दीनदयाल उपाध्याय राज्य कर्मचारी कैशलेस चिकित्सा योजना’ का स्टेट हेल्थ कार्ड है। 7 जनवरी 2022 के शासनादेश के मुताबिक़ इस कार्ड से आयुष्मान भारत में लिस्टेड प्राइवेट अस्पतालों में हर परिवार को साल में ₹5 लाख तक का कैशलेस इलाज मिलता है। इसी शासनादेश के मुताबिक़ यूपी के सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में कोई सीमा नहीं है। योजना के सवाल-जवाब (FAQ) के मुताबिक़ यह सुविधा सिर्फ़ भर्ती मरीज़ों के लिए है। इसी जवाब के मुताबिक़ OPD और जाँच के लिए चिकित्सा प्रतिपूर्ति (रीइंबर्समेंट) की पहले वाली व्यवस्था जारी है।

कार्ड के लिए अर्ज़ी sects.up.gov.in पर ऑनलाइन होती है। FAQ के मुताबिक़ कर्मचारी की अर्ज़ी उसका आहरण-वितरण अधिकारी (DDO) और पेंशनर की अर्ज़ी उसका कोषाधिकारी (TO) मंज़ूर करता है। FAQ के मुताबिक़ मंज़ूरी के बाद कार्ड राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) के पोर्टल beneficiary.nha.gov.in या आयुष्मान ऐप पर आधार e-KYC करके डाउनलोड होता है। योजना के पोर्टल के पेजों में कार्ड की किसी फ़ीस का ज़िक्र नहीं है।

ज़रूरी फ़ैक्ट्स

सभी आंकड़े जाँचे गए:

योजना और शासनादेश
पंडित दीनदयाल उपाध्याय राज्य कर्मचारी कैशलेस चिकित्सा योजना; शासनादेश 7 जनवरी 2022 (संख्या 10/पांच-1-22-19जी/2016)
सोर्स: sects.up.gov.in · 7 जनवरी 2022 तक की जानकारी
शुरुआत
मुख्यमंत्री ने 21 जुलाई 2022 को योजना शुरू की (साचीज का 28 जुलाई 2022 का पत्र)
सोर्स: sects.up.gov.in · 28 जुलाई 2022 तक की जानकारी
किसके लिए
यूपी के सरकारी सेवक, रिटायर्ड सरकारी सेवक (पेंशनर) और उनके आश्रित
सोर्स: sects.up.gov.in
फ़ैमिली पेंशनर
फ़ैमिली पेंशन पाने वाले भी स्टेट हेल्थ कार्ड के लिए अर्ज़ी दे सकते हैं (FAQ, सवाल 20)
सोर्स: sects.up.gov.in · 4 अप्रैल 2026 तक की जानकारी
प्राइवेट अस्पताल
आयुष्मान भारत (PM-JAY) में लिस्टेड प्राइवेट अस्पताल में हर परिवार को साल में ₹5 लाख तक कैशलेस इलाज
सोर्स: sects.up.gov.in · 7 जनवरी 2022 तक की जानकारी
सरकारी अस्पताल
यूपी के सरकारी अस्पताल, मेडिकल कॉलेज और संस्थानों में कैशलेस इलाज की कोई अधिकतम सीमा नहीं
सोर्स: sects.up.gov.in · 7 जनवरी 2022 तक की जानकारी
बाक़ी 19 फ़ैक्ट्स, सोर्स के साथ
कैशलेस किस पर
सिर्फ़ भर्ती मरीज़ (Indoor Patients); OPD और जाँच के लिए पहले की तरह चिकित्सा प्रतिपूर्ति
सोर्स: sects.up.gov.in · 4 अप्रैल 2026 तक की जानकारी
भर्ती से पहले का ख़र्च
मेडिकल कॉलेजों और संस्थानों के लिए: मरीज़ ख़ुद देगा; प्रतिपूर्ति मौजूदा नियमों से (चिकित्सा शिक्षा विभाग, 7 नवंबर 2022)
सोर्स: sects.up.gov.in · 7 नवंबर 2022 तक की जानकारी
टॉनिक जैसी दवाएँ
खाने की चीज़, टॉनिक या प्रसाधन की तरह इस्तेमाल होने वाली दवाओं का बिल नहीं बनेगा; उनका पैसा ख़ुद देना है (शासनादेश का सरकारी अस्पतालों वाला हिस्सा)
सोर्स: sects.up.gov.in · 7 जनवरी 2022 तक की जानकारी
कार्ड बनने तक
सरकारी अस्पताल में भर्ती होकर कराए इलाज की पूरी प्रतिपूर्ति, चिकित्सा अधीक्षक से जाँचे गए बिल पर
सोर्स: sects.up.gov.in · 7 जनवरी 2022 तक की जानकारी
कार्ड ज़रूरी
योजना का फ़ायदा लेने के लिए स्टेट हेल्थ कार्ड ज़रूरी (अनिवार्य); कार्ड के बिना कैशलेस नहीं (DGMH का SOP, 11 नवंबर 2022; योजना के होम पेज पर भी यही लिखा है)
सोर्स: sects.up.gov.in · 11 नवंबर 2022 तक की जानकारी
यूपी से बाहर
अभी स्टेट हेल्थ कार्ड से कैशलेस इलाज नहीं (FAQ, सवाल 19); लिस्ट से बाहर के अस्पताल में प्रतिपूर्ति मिलती है (सवाल 14)
सोर्स: sects.up.gov.in · 4 अप्रैल 2026 तक की जानकारी
वार्ड
पे-बैंड या पे-लेवल के हिसाब से सामान्य, सेमी-प्राइवेट या प्राइवेट; भर्ती के समय अस्पताल का आरोग्य मित्र पोर्टल से जाँचता है (DGMH का SOP, 11 नवंबर 2022)
सोर्स: sects.up.gov.in · 11 नवंबर 2022 तक की जानकारी
आश्रित की आमदनी की शर्त
हर तरह की आमदनी ₹3,500 और ₹3,500 मासिक मूल पेंशन पर मिलने वाली महंगाई के जोड़ से ज़्यादा न हो (2014 का नियम; 2021 के बदलाव का पाठ नहीं मिला)
सोर्स: sects.up.gov.in · 4 मार्च 2014 तक की जानकारी
पति या पत्नी
‘पूरी तरह आश्रित’ और ‘साथ रहने’ की शर्त पति-पत्नी पर लागू नहीं (शासनादेश, 26 नवंबर 2020 / 22 सितंबर 2021)
सोर्स: sects.up.gov.in · 22 सितंबर 2021 तक की जानकारी
बेटे-बेटी की उम्र
बेटा: नौकरी, 25 साल की उम्र या शादी तक, जो पहले हो; बेटी: नौकरी या शादी तक; स्थायी दिव्यांग बेटा पूरी उम्र
सोर्स: sects.up.gov.in · 4 मार्च 2014 तक की जानकारी
आवेदन और मंज़ूरी
sects.up.gov.in पर ऑनलाइन; कर्मचारी की अर्ज़ी उसका DDO, पेंशनर की अर्ज़ी कोषाधिकारी मंज़ूर करता है
सोर्स: sects.up.gov.in · 4 अप्रैल 2026 तक की जानकारी
ज़रूरी चीज़ें
आधार नंबर, आधार से लिंक मोबाइल, अपनी और हर आश्रित की 20 KB तक की फ़ोटो, आश्रितों के आधार; एक साल से छोटे बच्चे के अलावा बिना आधार रजिस्ट्रेशन नहीं
सोर्स: sects.up.gov.in · 4 अप्रैल 2026 तक की जानकारी
कार्ड डाउनलोड
DDO या कोषाधिकारी की मंज़ूरी के बाद beneficiary.nha.gov.in या आयुष्मान ऐप पर आधार e-KYC करके (FAQ की फ़ाइल 4 अप्रैल 2026 की: फ़ाइल और सर्वर की तारीख़)
सोर्स: sects.up.gov.in · 4 अप्रैल 2026 तक की जानकारी
पुराना डाउनलोड पता
2022 के फ़्लो चार्ट वाला पता sects.up.gov.in/PrintCard.aspx अब होम पेज खोलता है, जहाँ ‘Print State Health Card’ बटन दिखता है (14 और 15 अक्टूबर 2026 को देखा)
सोर्स: sects.up.gov.in
आयुष्मान कार्ड हो तो
परिवार के सारे आयुष्मान कार्ड बंद (निष्क्रिय) कराने के बाद ही स्टेट हेल्थ कार्ड बनेगा (FAQ, सवाल 17)
सोर्स: sects.up.gov.in · 4 अप्रैल 2026 तक की जानकारी
हेल्पलाइन
1800-1800-4444 (टोल-फ़्री); ईमेल support.sects@sachis.in
सोर्स: sects.up.gov.in
योजना के SMS
भेजने वाले का नाम ‘UPSBKS’
सोर्स: sects.up.gov.in
2026 के कैबिनेट फ़ैसले
शिक्षकों (29 जनवरी 2026), उच्च शिक्षा (10 मार्च 2026), होमगार्ड (6 जुलाई 2026) और PRD (प्रांतीय रक्षक दल, 15 सितंबर 2026) के लिए अलग कैशलेस योजनाएँ; इस योजना का कोई नया फ़ैसला नहीं मिला
सोर्स: information.up.gov.in
साइबर ठगी की शिकायत
1930 या cybercrime.gov.in
सोर्स: cybercrime.gov.in

2026 में इस योजना का कोई नया शासनादेश या कैबिनेट फ़ैसला हमें नहीं मिला (15 अक्टूबर 2026, रात 2 बजे तक)। शिक्षकों, होमगार्ड और PRD के कैशलेस कार्ड अलग योजनाओं के हैं।

यह कैशलेस कार्ड किसे मिलता है?

यूपी सरकार के सरकारी सेवकों, रिटायर्ड सरकारी सेवकों (पेंशनर) और उनके आश्रित परिवार को। योजना के पोर्टल के मुताबिक़ यह योजना ‘उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (चिकित्सा परिचर्या) नियमावली 2011’ के नियमों से चलती है, जिसमें 2014, 2016 और 2021 में बदलाव हुए। 7 जनवरी 2022 के शासनादेश के मुताबिक़ 2021 का बदलाव 5 जनवरी 2022 की अधिसूचना (संख्या 2992/2021) से हुआ; उसका पाठ हमें किसी सरकारी पेज पर नहीं मिला।

फ़ैमिली पेंशन पाने वाले भी कार्ड बनवा सकते हैं। FAQ के मुताबिक़ अर्ज़ी में नाम, लिंग, पिता का नाम और आधार उस व्यक्ति का भरा जाता है, जिसके नाम अभी PPO है। इसी जवाब के मुताबिक़ विभाग, आख़िरी पद, पे-बैंड और दफ़्तर जैसी बाक़ी जानकारी मूल पेंशनर की भरी जाती है।

FAQ के मुताबिक़ जो अफ़सर अपना वेतन ख़ुद निकालते हैं (Self-DDO), उनकी अर्ज़ी उनके विभाग का DDO जाँचता है।

यूपी से बाहर रहने वाले, दूसरे राज्य के कोषागार से पेंशन पाने वाले पेंशनरों के लिए FAQ के मुताबिक़ अलग फ़ॉर्म ‘तैयार किया जा रहा है’। 15 अक्टूबर 2026 को पोर्टल के मेन्यू में हमें इस फ़ॉर्म का अलग लिंक नहीं दिखा।

परिवार में किस-किसका नाम कार्ड में जुड़ सकता है?

पति या पत्नी का, बिना ‘आश्रित’ होने की शर्त के। बाक़ी रिश्तेदारों का तभी, जब वे पूरी तरह आप पर आश्रित हों और आम तौर पर आपके साथ रहते हों। आश्रित जोड़ने के लिए पोर्टल पर 4 मार्च 2014 के उत्तर प्रदेश असाधारण गजट का पन्ना लगा है। उसके मुताबिक़ ‘परिवार’ में ये आते हैं:

  • पति या पत्नी;
  • माता-पिता, बच्चे, सौतेले बच्चे और सौतेली माँ;
  • अविवाहित, तलाक़शुदा या पति से अलग रह रही (परित्यक्त) बेटी, और ऐसी ही बहनें;
  • नाबालिग (अवयस्क) भाई।

शासनादेश (26 नवंबर 2020 / 22 सितंबर 2021) के मुताबिक़ ‘पूरी तरह आश्रित’ और ‘साथ रहने’ की शर्त पति-पत्नी पर लागू नहीं होती। बाक़ियों के लिए गजट के मुताबिक़ ‘पूरी तरह आश्रित’ का मतलब है कि इलाज शुरू होते समय उसकी हर तरह की आमदनी ₹3,500 और ₹3,500 की मासिक मूल पेंशन पर मिलने वाली महंगाई के जोड़ से ज़्यादा न हो। 5 जनवरी 2022 के बदलाव के बाद यह शर्त वैसी ही है या नहीं, हमें किसी सरकारी पेज पर नहीं मिला। यह रकम आज कितनी बनती है, नियम में नहीं लिखा; अपने DDO या कोषागार से पूछें।

उम्र की सीमा भी गजट के इसी नियम में है:

  • बेटा: नौकरी लगने, 25 साल का होने या शादी होने तक, जो पहले हो;
  • बेटी: नौकरी लगने या शादी होने तक, जो पहले हो;
  • मानसिक या शारीरिक रूप से स्थायी दिव्यांग बेटा: पूरी उम्र;
  • आश्रित तलाक़शुदा, परित्यक्त या विधवा बेटी, और आश्रित अविवाहित, तलाक़शुदा, परित्यक्त या विधवा बहन: पूरी उम्र;
  • नाबालिग भाई: बालिग होने तक।

कार्ड से कितने तक का इलाज मिलता है, और किन अस्पतालों में?

लिस्टेड प्राइवेट अस्पताल में पूरे परिवार के लिए साल में ₹5 लाख तक, और सरकारी अस्पताल में बिना किसी सीमा के। शासनादेश के मुताबिक़ प्राइवेट अस्पताल वही चलेंगे, जो आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY) में लिस्टेड (आबद्ध) हैं। ₹5 लाख की सीमा ‘प्रति लाभार्थी परिवार प्रति वर्ष’ है, यानी हर सदस्य की अलग नहीं। ₹5 लाख से ऊपर का ख़र्च कैसे मिलेगा, और ‘साल’ कैलेंडर साल है, वित्त वर्ष है या कार्ड से 12 महीने, यह शासनादेश और FAQ में नहीं लिखा।

सरकारी अस्पतालों के बारे में शासनादेश कहता है कि ज़रूरत के हिसाब से कैशलेस इलाज होगा, ‘जिसकी कोई अधिकतम् सीमा निर्धारित नहीं होगी’। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाओं के महानिदेशक के 11 नवंबर 2022 के SOP के मुताबिक़ यह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) और उससे बड़े सभी सरकारी अस्पतालों में लागू है।

FAQ (सवाल 18) के मुताबिक़ अपने ज़िले के अस्पताल पोर्टल पर देखें: ‘Hospital’ मेन्यू में ‘Hospital List’ खोलें, ज़िला, इलाज का विभाग (Specialities) और ‘Public’ या ‘Private’ चुनकर ‘Find Hospital’ दबाएँ।

अस्पताल में कौन-सा वार्ड मिलेगा, यह आपके पे-बैंड या पे-लेवल से तय होता है: सामान्य, सेमी-प्राइवेट या प्राइवेट। शासनादेश (जनवरी 2022) में लिखा था कि प्राइवेट अस्पतालों में अभी सिर्फ़ सामान्य वार्ड मिलेगा और पे-बैंड वाले वार्ड बाद में। साचीज (राज्य की आयुष्मान भारत एजेंसी) के 28 जुलाई 2022 के पत्र के मुताबिक़ प्राइवेट अस्पतालों में भी वार्ड पे-बैंड या पे-लेवल से मिलता है।

पोर्टल पर लगे वार्ड वाले नोट के मुताबिक़ प्राइवेट वार्ड में एक मरीज़ का AC कमरा होता है, सेमी-प्राइवेट में दो-तीन मरीज़ और सामान्य में चार से दस मरीज़ों का हॉल। उसी नोट के मुताबिक़ जिस अस्पताल में ऐसा कमरा नहीं है, वह उस वार्ड का क्लेम नहीं कर सकता।

किस पे-लेवल पर कौन-सा वार्ड, यह हमें पोर्टल के डॉक्यूमेंट में नहीं मिला। पे-बैंड वाले नोट में सिर्फ़ मूल वेतन के तीन ग्रुप और उनके पे-बैंड व पे-लेवल हैं।

आपके इलाज पर कार्ड काम करेगा या नहीं, यह नीचे अपने हाल के हिसाब से देखिए।

आपका इलाज कैशलेस होगा, या पैसा पहले देना होगा?

टूल की जानकारी पढ़ें

यह टूल तीन सवाल पूछता है: इलाज कहाँ हो रहा है (यूपी का सरकारी अस्पताल या मेडिकल कॉलेज, यूपी का आयुष्मान-लिस्टेड प्राइवेट अस्पताल, लिस्ट से बाहर का प्राइवेट अस्पताल, या यूपी से बाहर), किस तरह का इलाज है (भर्ती, OPD, भर्ती से पहले की जाँच, या टॉनिक, खाने की चीज़ या कॉस्मेटिक की तरह इस्तेमाल होने वाली दवा), और स्टेट हेल्थ कार्ड बना है या नहीं। जवाब यह है: 7 जनवरी 2022 के शासनादेश के मुताबिक़ सरकारी अस्पतालों में भर्ती होने पर कैशलेस इलाज की कोई सीमा नहीं है, और आयुष्मान भारत में लिस्टेड प्राइवेट अस्पताल में पूरे परिवार के लिए साल में ₹5 लाख तक कैशलेस इलाज है। कैशलेस इलाज कार्ड से पहचान के बाद ही मिलता है; कार्ड बनने तक सरकारी अस्पताल में भर्ती के इलाज की पूरी प्रतिपूर्ति, चिकित्सा अधीक्षक के जाँचे बिल पर, ‘प्रशासनिक विभाग’ करेगा। योजना के FAQ के मुताबिक़ कैशलेस सिर्फ़ भर्ती मरीज़ों के लिए है; OPD और जाँच के लिए पहले की तरह प्रतिपूर्ति (रीइंबर्समेंट, यानी बाद में पैसा वापस) है, लिस्ट से बाहर के अस्पताल में भी प्रतिपूर्ति मिलती है, और यूपी के बाहर अभी कैशलेस नहीं है। चिकित्सा शिक्षा विभाग का 7 नवंबर 2022 का आदेश मेडिकल कॉलेजों और संस्थानों के लिए है: उसके मुताबिक़ भर्ती से पहले का ख़र्च मरीज़ देगा और उसकी प्रतिपूर्ति मौजूदा नियमों से होगी। शासनादेश के सरकारी अस्पतालों वाले हिस्से के मुताबिक़ खाने की चीज़, टॉनिक या प्रसाधन की तरह इस्तेमाल होने वाली दवाओं का पैसा ख़ुद देना है। DGMH के SOP और योजना के होम पेज के मुताबिक़ योजना का फ़ायदा लेने के लिए स्टेट हेल्थ कार्ड ज़रूरी है। ₹5 लाख से ऊपर के ख़र्च का नियम शासनादेश और FAQ में नहीं लिखा; हेल्पलाइन 1800-1800-4444 है। आप जो टैप करते हैं, वह कहीं सेव या भेजा नहीं जाता।

Sources जाँचे गए: 15 अक्टूबर 2026

किस इलाज पर कैशलेस नहीं मिलता?

OPD पर, भर्ती से पहले की जाँचों पर, टॉनिक जैसी दवाओं पर, और यूपी के बाहर। FAQ के मुताबिक़ कैशलेस सुविधा ‘केवल भर्ती मरीजों (Indoor Patients) के लिए’ है, और OPD व जाँच के लिए चिकित्सा प्रतिपूर्ति पहले की तरह चलती रहेगी। चिकित्सा शिक्षा विभाग का 7 नवंबर 2022 का आदेश मेडिकल कॉलेजों और संस्थानों के लिए है। उसके मुताबिक़ भर्ती से पहले का सारा ख़र्च मरीज़ ख़ुद उठाएगा। उसी आदेश के मुताबिक़ उसकी प्रतिपूर्ति मौजूदा नियमों से होगी। प्राइवेट अस्पतालों और स्वास्थ्य विभाग के अस्पतालों के लिए ऐसा अलग आदेश हमें नहीं मिला।

शासनादेश के सरकारी अस्पतालों वाले हिस्से के मुताबिक़ बिल में सिर्फ़ प्रोसीजर, जाँचें और ज़रूरी दवाएँ आती हैं। जो दवाएँ खाने की चीज़, टॉनिक या प्रसाधन (कॉस्मेटिक) की तरह इस्तेमाल होती हैं, उनका पैसा कर्मचारी, पेंशनर या आश्रित को ख़ुद देना है। FAQ के मुताबिक़ अभी स्टेट हेल्थ कार्ड से यूपी के बाहर किसी अस्पताल में कैशलेस इलाज नहीं मिलता।

कैशलेस के साथ प्रतिपूर्ति का पुराना रास्ता भी खुला है। शासनादेश के मुताबिक़ पहले की व्यवस्था से किसी भी अस्पताल में इलाज कराकर प्रतिपूर्ति ली जा सकती है। FAQ (सवाल 14) के मुताबिक़ लिस्ट से बाहर के अस्पताल में भी। शासनादेश के मुताबिक़ कार्ड बनने तक सरकारी अस्पताल में भर्ती होकर कराए इलाज की पूरी प्रतिपूर्ति ‘प्रशासनिक विभाग’ करेगा, चिकित्सा अधीक्षक के जाँचे बिल पर। पर DGMH के SOP और योजना के होम पेज के मुताबिक़ योजना का फ़ायदा लेने के लिए कार्ड ज़रूरी (अनिवार्य) है। कार्ड के बिना कैशलेस नहीं मिलता। यह रास्ता बाद में पैसा वापस पाने का है।

स्टेट हेल्थ कार्ड के लिए आवेदन कैसे करें?

ऑनलाइन, योजना के पोर्टल पर। FAQ, अर्ज़ी वाले पेज और 2022 के फ़्लो चार्ट के मुताबिक़ तरीक़ा यह है:

  1. sects.up.gov.in खोलें और ‘Apply for State Health Card’ दबाएँ।
  2. मोबाइल नंबर डालें और उस पर आया OTP भरें। अर्ज़ी वाले पेज के मुताबिक़ सिर्फ़ वही नंबर डालें, जो आपके आधार से लिंक है।
  3. अपनी जानकारी भरकर ‘Save & Continue’ दबाएँ।
  4. आश्रितों को उनकी फ़ोटो और आधार के साथ जोड़ें, फिर ‘Save & Continue’ दबाएँ।
  5. अर्ज़ी ‘Submit’ करें और उसका प्रिंट रखें। अर्ज़ी अब मंज़ूरी के लिए जाती है: कर्मचारी की DDO के पास, पेंशनर की कोषाधिकारी के पास।

FAQ के मुताबिक़ फ़ॉर्म भरने से पहले ये चीज़ें तैयार रखें:

  • अपना आधार नंबर और आधार से लिंक मोबाइल नंबर;
  • नियम के मुताबिक़ आश्रितों की लिस्ट, और सभी आश्रितों के आधार नंबर;
  • अपनी और हर आश्रित की एक पासपोर्ट साइज़ फ़ोटो, ज़्यादा से ज़्यादा 20 KB की;
  • स्थायी दिव्यांग आश्रित का दिव्यांगता सर्टिफ़िकेट (फ़ॉर्म का शब्द: विकलांगता प्रमाणपत्र), और एक साल से छोटे बच्चे का जन्म सर्टिफ़िकेट।

FAQ के मुताबिक़ कर्मचारी अपना वेतन सातवें वेतन आयोग के हिसाब से भरें, और पेंशनर अपना आख़िरी वेतन, सातवें वेतन आयोग के हिसाब से। इसी जवाब के मुताबिक़ फ़ॉर्म जमा करने के बाद आधार नंबर और मोबाइल नंबर आप ख़ुद नहीं बदल सकते, इसलिए ये दोनों ध्यान से भरें। FAQ के मुताबिक़ आधार के बिना किसी का रजिस्ट्रेशन नहीं होता; सिर्फ़ एक साल से छोटे बच्चे इससे छूटे हैं।

स्टेट हेल्थ कार्ड डाउनलोड कैसे करें?

DDO या कोषाधिकारी की मंज़ूरी के बाद, NHA के पोर्टल पर या आयुष्मान ऐप में, आधार e-KYC करके। FAQ के मुताबिक़ मंज़ूरी का SMS आने पर उसमें दिए लिंक पर या beneficiary.nha.gov.in पर जाएँ, आधार e-KYC पूरा करें और कार्ड डाउनलोड करें।

2022 के प्रोसेस फ़्लो चार्ट में क़दम ये हैं। पहले मोबाइल नंबर OTP से वेरिफ़ाई करें। फिर राज्य, योजना का नाम, ज़िला और रजिस्ट्रेशन ID (चार्ट में ‘regid’) से अपना रिकॉर्ड खोजें। फिर अपना या आश्रित का नाम चुनकर आधार OTP से e-KYC करें।

उसी फ़्लो चार्ट में डाउनलोड का पता sects.up.gov.in/PrintCard.aspx लिखा है, और चार्ट के मुताबिक़ मंज़ूरी के SMS में भी यही पता था। 14 और 15 अक्टूबर 2026 को यह पता होम पेज पर ले गया, जहाँ ‘Print State Health Card’ बटन दिखता है, जो NHA के पोर्टल पर ले जाता है। होम पेज सीधे खोलने पर यह बटन नहीं दिखता। पुराने वीडियो या पोस्ट में यह पता दिखे, तो NHA के पोर्टल का रास्ता लें।

अर्ज़ी अटकी है या कार्ड नहीं बन रहा, तो क्या करें?

पहले देखें कि अर्ज़ी किसके पास रुकी है। फ़्लो चार्ट के मुताबिक़ एक हफ़्ते में कोई SMS न आए, तो पोर्टल के ‘Check Application Status’ पेज पर अर्ज़ी नंबर या आधार नंबर डालकर स्टेटस देखें। फिर:

  • स्टेटस ‘pending’ हो: कर्मचारी अपने DDO से और पेंशनर अपने कोषाधिकारी से बात करें (FAQ, सवाल 4)।
  • अर्ज़ी टिप्पणी के साथ लौटी हो: फ़्लो चार्ट के मुताबिक़ पोर्टल पर लॉग-इन करके टिप्पणी के हिसाब से जानकारी ठीक करें।
  • मंज़ूरी से पहले कुछ बदलना हो: ‘Edit Application’। मंज़ूरी के बाद: ‘Edit Approved Application’ से सुधार का अनुरोध भेजें, जिसे DDO या कोषाधिकारी मंज़ूर करेगा; सुधार के निर्देशों के मुताबिक़ उसमें मौजूदा DDO कोड, दफ़्तर का ज़िला और नाम ज़रूर भरें।
  • मोबाइल या आधार नंबर गलत भर गया हो: ‘महत्वपूर्ण सूचनाएँ’ में मोबाइल नंबर सुधार का फ़ॉर्म और आधार नंबर सुधार का फ़ॉर्म हैं। FAQ के मुताबिक़ फ़ॉर्म support.sects@sachis.in पर भेजना है, पर फ़ॉर्म पर नीचे एक दूसरा, gmail वाला पता छपा है; भेजने से पहले हेल्पलाइन पर पूछ लें। फ़ॉर्म के मुताबिक़ सुधार पूरा होने तक आपका कार्ड बंद (निष्क्रिय) हो सकता है।
  • परिवार में किसी का आयुष्मान कार्ड बना है: FAQ के मुताबिक़ उन सब कार्डों और आधार की फ़ोटोकॉपी के साथ कार्ड बंद कराने की चिट्ठी support.sects@sachis.in पर भेजें। FAQ के मुताबिक़ सारे आयुष्मान कार्ड बंद होने के बाद ही स्टेट हेल्थ कार्ड बनेगा। बंद कराने से पहले हेल्पलाइन से पूछ लें: FAQ में नहीं लिखा कि बंद हुआ आयुष्मान कार्ड दोबारा चालू हो सकता है या नहीं।
  • e-KYC में गड़बड़ी (error) दिखे: उस पेज का पूरा स्क्रीनशॉट लें और दिक़्क़त लिखकर support.sects@sachis.in पर भेजें; FAQ के मुताबिक़ इसे NHA को भेजकर ठीक कराया जाएगा।

2026 में इस कार्ड में क्या नया है?

इस योजना का कोई नया शासनादेश या कैबिनेट फ़ैसला हमें नहीं मिला। 15 अक्टूबर 2026 को रात 2 बजे तक हमने यूपी कैबिनेट के 14 नवंबर 2025 से 9 अक्टूबर 2026 तक के सभी 14 फ़ैसलों की प्रेस रिलीज़ में कैशलेस, प्रतिपूर्ति, स्टेट हेल्थ कार्ड और पेंशनर जैसे शब्द खोजे। ये प्रेस रिलीज़ सूचना एवं जनसंपर्क विभाग की मंत्रिपरिषद के निर्णयों की लिस्ट में हैं। कैशलेस वाले फ़ैसले सिर्फ़ शिक्षकों, होमगार्ड और PRD के मिले। विभाग की प्रेस रिलीज़ की लिस्टें भी देखीं। योजना के पोर्टल पर ‘GOs/Guidelines’ में सबसे नया आदेश नवंबर 2022 का है। यूपी के शासनादेशों वाली वेबसाइट पर कैप्चा भरना पड़ता है, इसलिए वहाँ हमने नहीं खोजा।

जो बदला दिखता है, वह कार्ड डाउनलोड का रास्ता है। FAQ की फ़ाइल 4 अप्रैल 2026 की है (फ़ाइल की अपनी तारीख़ के मुताबिक़)। उसमें डाउनलोड NHA के पोर्टल या आयुष्मान ऐप से बताया गया है। होम पेज के नोटिस में मंज़ूरी के बाद अर्ज़ी में सुधार की बात भी है, पर उस पर तारीख़ नहीं है।

2026 में ‘कैशलेस कार्ड’ की कई और योजनाएँ आईं, जो इस कार्ड से अलग हैं:

इन योजनाओं की अर्ज़ी और कार्ड का तरीक़ा इस खबर में नहीं है; इसके लिए अपने विभाग से पूछें।

अस्पताल कैशलेस इलाज न दे, तो शिकायत कहाँ करें?

योजना की हेल्प डेस्क के टोल-फ़्री नंबर 1800-1800-4444 पर। FAQ (सवाल 13) के मुताबिक़ कोई लिस्टेड अस्पताल कैशलेस इलाज से मना करे या कोई और दिक़्क़त हो, तो इस नंबर पर या ईमेल support.sects@sachis.in पर बात करें। योजना के कॉन्टैक्ट पेज पर साचीज (SACHIS) के दफ़्तर का डाक का पता भी है।

फ़र्ज़ी कॉल और मैसेज कैसे पहचानें?

पोर्टल के मुताबिक़ योजना के सभी SMS में भेजने वाला (प्रेषक) ‘UPSBKS’ है। अर्ज़ी sects.up.gov.in पर होती है, और कार्ड beneficiary.nha.gov.in या आयुष्मान ऐप से डाउनलोड होता है; ये पते ख़ुद टाइप करें, किसी अनजान लिंक से नहीं। पोर्टल के पेजों में फ़ीस का ज़िक्र नहीं है, इसलिए कोई कार्ड के नाम पर पैसा माँगे, तो पहले हेल्पलाइन 1800-1800-4444 पर पूछें।

अर्ज़ी और e-KYC में OTP आता है, और उसे आपको ख़ुद भरना है। कोई फ़ोन पर ‘कार्ड चालू करने’ या ‘e-KYC पूरा करने’ के नाम पर OTP, आधार या बैंक की जानकारी माँगे, तो न दें। आधार की कॉपी ईमेल से भेजनी हो, तो पता योजना के कॉन्टैक्ट पेज या FAQ से ही लें, किसी SMS, पोस्ट या कॉल से नहीं। स्कीम समाचार आपसे कोई जानकारी या पैसा नहीं माँगता। ठगी हो जाए तो साइबर क्राइम पोर्टल के मुताबिक़ हेल्पलाइन 1930 पर फ़ोन करें, या cybercrime.gov.in पर शिकायत करें।

ख़ुद कहाँ जाँचें?

इन सरकारी पेजों पर:

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