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Svamitva Yojana Property Card: 2.72 करोड़ कार्ड बँटे, इन पर लोन अब तक 11,147; नाम-नाप ग़लत हो तो क्या करें

यह गाँव की आबादी वाली ज़मीन पर बने घर या प्लॉट का मालिकाना रिकॉर्ड है, जो ड्रोन सर्वे के बाद राज्य देता है। यूपी में इसे घरौनी कहते हैं; नाम या नाप ग़लत हो तो ड्राफ़्ट पर आपत्ति का रास्ता है।

Svamitva Yojana Property Card: 2.72 करोड़ कार्ड बँटे, इन पर लोन अब तक 11,147; नाम-नाप ग़लत हो तो क्या करें
AI से बनी तस्वीर · Svamitva Yojana Property Card: 2.72 करोड़ कार्ड बँटे, इन पर लोन अब तक 11,147; नाम-नाप ग़लत हो तो क्या करें · चित्र: स्कीम समाचार

स्वामित्व योजना का प्रॉपर्टी कार्ड गाँव के आबादी वाले हिस्से में बने घर या प्लॉट का मालिकाना रिकॉर्ड है। पहले गाँव का ड्रोन से सर्वे होता है। फिर ज़मीनी जाँच होती है और आपत्तियाँ सुनी जाती हैं। उसके बाद राज्य का राजस्व विभाग कार्ड देता है। राज्यों में इसके नाम अलग हैं: उत्तर प्रदेश में घरौनी, मध्य प्रदेश में अधिकार अभिलेख, महाराष्ट्र में सनद।

लोकसभा में 4 अगस्त 2026 को दिए जवाब के मुताबिक़ तब तक 3.24 करोड़ कार्ड बन चुके थे, और करीब 2.72 करोड़ कार्ड मालिकों को बँट चुके थे। उसी जवाब के मुताबिक़ इन कार्डों के आधार पर 11,147 बैंक लोन दिए गए थे, कुल ₹1,713 करोड़ के, 7 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में। कार्ड पर नाम या नाप ग़लत हो, तो पक्का होने से पहले ड्राफ़्ट पर आपत्ति देने का रास्ता है; कितने दिन में देनी है, यह राज्य के नियम तय करते हैं।

ज़रूरी फ़ैक्ट्स

सभी आंकड़े जाँचे गए:

योजना क्या है
गाँव के आबादी वाले इलाक़ों में संपत्ति के मालिकों को ‘अधिकारों का रिकॉर्ड’ (Record of Rights) देना; ड्रोन सर्वे और CORS तकनीक से एकदम सही नक़्शा (PIB, 5 अगस्त 2026)
सोर्स: pib.gov.in · 5 अगस्त 2026 तक की जानकारी
कार्ड कौन बनाता और देता है
ड्रोन सर्वे और नक़्शे का पैसा पंचायती राज मंत्रालय सर्वे ऑफ़ इंडिया को देता है; ज़मीनी जाँच, कार्ड बनाना और बाँटना राज्य करते हैं (लोकसभा, 4 अगस्त 2026)
सोर्स: sansad.in · 4 अगस्त 2026 तक की जानकारी
राज्यों में कार्ड का नाम (योजना की गाइडलाइन)
उत्तर प्रदेश: घरौनी; मध्य प्रदेश: अधिकार अभिलेख; महाराष्ट्र: सनद; हरियाणा: टाइटल डीड; कर्नाटक: रूरल प्रॉपर्टी ओनरशिप रिकॉर्ड (RPOR); उत्तराखंड: स्वामित्व अभिलेख
सोर्स: svamitva.nic.in · 14 अक्टूबर 2026 तक की जानकारी
ड्रोन सर्वे (लोकसभा, 21 जुलाई 2026)
3,38,722 चुने गए (अधिसूचित) गाँवों में से 3,30,854 में पूरा
सोर्स: sansad.in · 21 जुलाई 2026 तक की जानकारी
कार्ड बने (लोकसभा, 21 जुलाई 2026)
1,97,186 गाँवों के लिए 3,24,16,278 कार्ड, यानी 3.24 करोड़
सोर्स: sansad.in · 21 जुलाई 2026 तक की जानकारी
कार्ड बँटे (लोकसभा, 4 अगस्त 2026)
करीब 2.72 करोड़ कार्ड मालिकों को बँटे (टेबल में 2,72,29,538)
सोर्स: sansad.in · 4 अगस्त 2026 तक की जानकारी
बाक़ी 20 फ़ैक्ट्स, सोर्स के साथ
कार्ड पर बैंक लोन (लोकसभा, 4 अगस्त 2026)
11,147 लोन, कुल ₹1,713 करोड़; राजस्थान 8,808, मध्य प्रदेश 2,202, गुजरात 43, महाराष्ट्र 37, जम्मू-कश्मीर 29, मिज़ोरम 19, लद्दाख 9; उत्तर प्रदेश इस लिस्ट में नहीं
सोर्स: sansad.in · 4 अगस्त 2026 तक की जानकारी
लोन और कार्ड का हमारा हिसाब
हर 10,000 बँटे कार्ड पर करीब 4 लोन (11,147 ÷ 2,72,29,538); यह हिसाब हमारा है। लोन 7 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के हैं, कार्ड सब राज्यों के
सोर्स: sansad.in · 4 अगस्त 2026 तक की जानकारीअनुमान — अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं
बैंकों ने कितने कार्ड नहीं माने
मंत्रालय यह गिनती नहीं रखता (लोकसभा, 11 अगस्त 2026)
सोर्स: sansad.in · 11 अगस्त 2026 तक की जानकारी
विवाद घटे या नहीं
मंत्रालय ने इसका कोई आकलन (स्टडी) नहीं किया, और योजना से पहले-बाद सुलझे विवादों की गिनती नहीं रखता (लोकसभा, 21 जुलाई 2026)
सोर्स: sansad.in · 21 जुलाई 2026 तक की जानकारी
पंचायत का प्रॉपर्टी टैक्स
21 जुलाई 2026 के जवाब में IIM अहमदाबाद की स्टडी के हवाले से टैक्स बढ़ने की बात; 11 अगस्त 2026 के जवाब में मंत्रालय: पंचायत की कमाई या प्रॉपर्टी टैक्स पर कोई स्टडी नहीं की, यह राज्य का विषय है
सोर्स: sansad.in · 11 अगस्त 2026 तक की जानकारी
आपत्ति (देश भर)
राज्य ड्राफ़्ट नक़्शे छापते हैं, दावे और आपत्तियाँ राज्य के राजस्व क़ानून के हिसाब से; सर्वे में सच में कमी मिले तो ज़रूरत पर ड्रोन दोबारा उड़ाया जाता है (लोकसभा, 11 अगस्त 2026)
सोर्स: sansad.in · 11 अगस्त 2026 तक की जानकारी
आपत्ति (उत्तर प्रदेश, अधिनियम 2025, धारा 9 और 10)
2 जनवरी 2026 से लागू। कच्ची घरौनी ग्राम सभा की खुली बैठक में सहायक अभिलेख अधिकारी (आम तौर पर SDM) छापते हैं; घरौनी की किसी एंट्री से नाराज़ व्यक्ति ‘तय समय’ के अंदर अभिलेख अधिकारी (ज़िले के कलेक्टर) को आपत्ति देता है; वह समय नियमों में तय होना है, ऐसे नियम हमें नहीं मिले; कलेक्टर सब पक्षों की सहमति से ग़लती सुधारते हैं, झगड़े वाली एंट्री पर ‘विवादित’ लिखा जाता है
सोर्स: indiacode.gov.in · 2 जनवरी 2026 तक की जानकारी
आपत्ति (उत्तर प्रदेश, 8 अक्टूबर 2020 की नियमावली; अधिनियम से पहले का रास्ता)
कच्ची घरौनी ग्राम पंचायत की खुली बैठक में; नोटिस मिलने के 15 दिन में फ़ॉर्म-9 पर उपज़िलाधिकारी (SDM) को; उनके आदेश से नाराज़ हों तो 15 दिन में कलेक्टर को; न सुलझा झगड़ा ‘विवादित’, बदलाव अदालत के आदेश से
सोर्स: svamitva.up.gov.in · 8 अक्टूबर 2020 तक की जानकारी
घरौनी मिलने के बाद बदलाव (उत्तर प्रदेश, अधिनियम 2025, धारा 13 से 15)
लिखने की ग़लती या छूटी एंट्री ठीक कराने और फ़ोन नंबर या पता बदलवाने का आवेदन सहायक अभिलेख अधिकारी को; बिना झगड़े का नाम बदलना (विरासत, रजिस्टर्ड बिक्री, गिफ़्ट, वसीयत, बँटवारा आदि) अधिनियम के तय तरीक़े से; झगड़ा हो तो अदालत से राहत; आवेदन का तरीक़ा नियमों में तय होना है, ऐसे नियम हमें नहीं मिले
सोर्स: indiacode.gov.in · 2 जनवरी 2026 तक की जानकारी
घरौनी की कॉपी (उत्तर प्रदेश, 8 अक्टूबर 2020 की नियमावली)
तहसील दफ़्तर या जन सुविधा केंद्र से, राजस्व परिषद की तय फ़ीस देकर
सोर्स: svamitva.up.gov.in · 8 अक्टूबर 2020 तक की जानकारी
आपत्ति (हिमाचल प्रदेश, क़ानून 2021 की धारा 11)
रिकॉर्ड गाँव में दिखाए जाने की तारीख़ से 30 दिन के अंदर सहायक अभिलेखन और समाधान अधिकारी (Assistant Recording and Resolution Officer) को आपत्ति; उसके बाद आपत्ति न आए तो एंट्री पक्की; अधिकारी 60 दिन में आदेश देता है; आदेश के 30 दिन में अपील। (लोकसभा, 16 दिसंबर 2025 के जवाब में आपत्ति के लिए ‘60 दिन’ लिखा है, जो क़ानून के पाठ से मेल नहीं खाता)
सोर्स: indiacode.gov.in · 2 फ़रवरी 2022 तक की जानकारी
DigiLocker
PIB (18 जनवरी 2025): प्रॉपर्टी कार्ड DigiLocker ऐप में देखे और डाउनलोड किए जा सकते हैं; गाइडलाइन के मुताबिक़ कार्ड को DigiLocker से जोड़ना राज्य पर है
सोर्स: static.pib.gov.in · 18 जनवरी 2025 तक की जानकारी
उत्तर प्रदेश (13 जुलाई 2026 तक)
सभी 90,573 चुने गए गाँवों में ड्रोन सर्वे; करीब 75 हज़ार गाँवों के लिए 1.20 करोड़ घरौनी बनीं (करीब 83% गाँव); करीब 67 हज़ार गाँवों में 1.01 करोड़ बँटीं
सोर्स: sansad.in · 13 जुलाई 2026 तक की जानकारी
यूपी स्वामित्व वेबसाइट की हेल्पलाइन
7080100588, सोमवार से शुक्रवार, सुबह 9:30 से शाम 6 बजे (पेज पर ‘Last Updated’ 27 मई 2022)
सोर्स: svamitva.up.gov.in · 14 अक्टूबर 2026 तक की जानकारी
योजना की मियाद
16 दिसंबर 2025 के जवाब में मार्च 2026 तक; 21 जुलाई 2026 के जवाब में सितंबर 2026 तक बढ़ाई गई (वह तारीख़ निकल चुकी है); उसके बाद की कोई तारीख़ हमें नहीं मिली
सोर्स: sansad.in · 21 जुलाई 2026 तक की जानकारी
कौन-से राज्य लिस्ट में नहीं, कहाँ कार्ड नहीं बने
4 अगस्त 2026 की लिस्ट में 31 राज्य/केंद्रशासित प्रदेश; बिहार, पश्चिम बंगाल, मेघालय, नागालैंड और चंडीगढ़ नहीं। अरुणाचल, असम, झारखंड, केरल, मणिपुर, सिक्किम, तमिलनाडु और तेलंगाना में तब तक एक भी कार्ड नहीं बना
सोर्स: sansad.in · 4 अगस्त 2026 तक की जानकारी
तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश
तमिलनाडु: पायलट के 3 गाँवों से आगे योजना लागू न करने का फ़ैसला (लोकसभा, 3 फ़रवरी 2026); आंध्र प्रदेश: कार्ड बने, पर फ़ॉर्मेट बदलने से एक भी नहीं बँटा (लोकसभा, 10 मार्च 2026)
सोर्स: sansad.in · 10 मार्च 2026 तक की जानकारी
महिलाएँ साझा मालिक (लोकसभा, 17 मार्च 2026)
कुछ राज्यों ने कार्ड में महिलाओं के साझा मालिकाना हक़ का इंतज़ाम किया, जैसे मध्य प्रदेश, हरियाणा, कर्नाटक, मिज़ोरम, छत्तीसगढ़, जम्मू-कश्मीर, पुडुचेरी, दमन-दीव और दादरा नगर हवेली; मंत्रालय महिला मालिकों की गिनती नहीं रखता
सोर्स: sansad.in · 17 मार्च 2026 तक की जानकारी
योजना के डैशबोर्ड पर (पेज पर ‘13-10-2026 की स्थिति’; हमने 14 अक्टूबर 2026 को देखा)
3,28,050 गाँवों में ड्रोन सर्वे; 1,87,480 गाँवों के कार्ड बने; 1,56,291 गाँवों में बँटे (वेबसाइट के मुताबिक़ आंकड़े ज़मीनी स्तर की एजेंसियाँ भरती हैं)
सोर्स: svamitva.nic.in · 14 अक्टूबर 2026 तक की जानकारी
साइबर ठगी की शिकायत
1930 या cybercrime.gov.in
सोर्स: cybercrime.gov.in

आपके राज्य में कार्ड का नाम क्या है, आपका प्लॉट किस मोड़ पर है, और कुछ ग़लत हो तो अगला क़दम क्या है, यह नीचे अपने हाल के हिसाब से देखिए।

आपके राज्य में स्वामित्व कार्ड का नाम क्या है, और नाम या नाप ग़लत हो तो अब क्या करें?

टूल की जानकारी पढ़ें

यह टूल तीन बातें पूछता है: आपका राज्य, आपका घर किस मोड़ पर है (सर्वे का पता नहीं, चूने की लकीर खिंची या ड्रोन उड़ा, कच्चा रिकॉर्ड पढ़ा गया या नोटिस मिला, कार्ड मिल गया), और क्या कुछ ग़लत है (नाम, सीमा या नाप, झगड़ा, घर छूटा, बैंक लोन)। फिर यह आपके राज्य में कार्ड का नाम बताता है: उत्तर प्रदेश में घरौनी, मध्य प्रदेश में अधिकार अभिलेख, महाराष्ट्र में सनद, हरियाणा में टाइटल डीड, कर्नाटक में RPOR, उत्तराखंड में स्वामित्व अभिलेख (योजना की गाइडलाइन)। लोकसभा के 4 अगस्त 2026 के जवाब की टेबल के मुताबिक़ यह भी बताता है कि आपके राज्य में कार्ड बने और बँटे या नहीं। आपत्ति कच्चे रिकॉर्ड के समय देनी होती है, राज्य के राजस्व क़ानून के हिसाब से (लोकसभा, 11 अगस्त 2026)। उत्तर प्रदेश में 2 जनवरी 2026 से लागू अधिनियम की धारा 10 के मुताबिक़ आपत्ति कलेक्टर को ‘तय समय’ के अंदर दी जाती है; वह समय नियमों में तय होना है, और ऐसे नियम हमें नहीं मिले। 2020 की नियमावली में नोटिस मिलने के 15 दिन के अंदर फ़ॉर्म-9 पर उपज़िलाधिकारी (SDM) को आपत्ति, और उनके आदेश पर 15 दिन में कलेक्टर के पास जाने का रास्ता लिखा है; इसलिए नोटिस में लिखे अधिकारी और दिन मानें। हिमाचल में क़ानून के मुताबिक़ रिकॉर्ड दिखाए जाने की तारीख़ से 30 दिन के अंदर आपत्ति देनी होती है। सर्वे में सच में कमी हो तो ड्रोन दोबारा उड़ाया जाता है। कार्ड बनने के बाद उत्तर प्रदेश में लिखने की ग़लती ठीक कराने का आवेदन SDM को जाता है (अधिनियम की धारा 13)। लोन के लिए पहले बैंक से पूछें: 4 अगस्त 2026 तक 11,147 लोन (₹1,713 करोड़) 7 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में मिले थे। कार्ड की कॉपी: PIB के मुताबिक़ DigiLocker पर, और यूपी में तहसील या जन सुविधा केंद्र से फ़ीस देकर। पैसा, OTP या आधार माँगने वाले से बचें; ठगी हो तो 1930। आप जो चुनते या टैप करते हैं, वह कहीं सेव या भेजा नहीं जाता।

Sources जाँचे गए: 15 अक्टूबर 2026

स्वामित्व योजना और इसका प्रॉपर्टी कार्ड क्या है?

यह पंचायती राज मंत्रालय की योजना है, जो गाँव के आबादी वाले, यानी रिहायशी हिस्से का नक़्शा बनाती है। PIB की 5 अगस्त 2026 की रिलीज़ के मुताबिक़ इसका मक़सद गाँव के आबादी वाले इलाक़ों में संपत्ति के मालिकों को ‘अधिकारों का रिकॉर्ड’ (Record of Rights) देना है। इसके लिए ड्रोन सर्वे और CORS नाम की तकनीक से बहुत सही नाप वाले नक़्शे बनाए जाते हैं।

इसकी ज़रूरत क्यों पड़ी, यह योजना की गाइडलाइन बताती है। गाइडलाइन के मुताबिक़ ज़्यादातर राज्यों में गाँव के आबादी वाले हिस्से का सर्वे या नक़्शा बना ही नहीं था। उसके मुताबिक़ इसी वजह से वहाँ के मालिकों के पास ऐसा क़ानूनी काग़ज़ नहीं था, जिसे बैंक मानें।

गाइडलाइन के मुताबिक़ सर्वे से पहले कलेक्टर नोटिस देकर इलाक़ा बताते हैं, और ग्राम सभा में तारीख़ें बताई जाती हैं। उसके मुताबिक़ ड्रोन उड़ने से पहले मालिकों और ग्राम पंचायत के साथ हर प्लॉट की लकीर चूने से खींची जाती है; राज्य और सर्वे ऑफ़ इंडिया राज़ी हों, तो बिना चूने के भी सर्वे हो सकता है। फिर नक़्शा बनता है, उसकी ज़मीनी जाँच होती है, आपत्तियाँ सुनी जाती हैं, और आख़िर में कार्ड बँटते हैं।

4 अगस्त 2026 के लोकसभा जवाब के मुताबिक़ ड्रोन सर्वे और नक़्शे का पैसा पंचायती राज मंत्रालय सर्वे ऑफ़ इंडिया को देता है। उसी जवाब के मुताबिक़ उसके बाद ज़मीनी जाँच, कार्ड बनाना और बाँटना राज्य करते हैं।

आपके राज्य में इस कार्ड का नाम क्या है?

राज्य-राज्य में कार्ड का नाम अलग है। योजना की गाइडलाइन के मुताबिक़ हरियाणा में इसे ‘टाइटल डीड’ कहते हैं, कर्नाटक में ‘रूरल प्रॉपर्टी ओनरशिप रिकॉर्ड’ (RPOR), मध्य प्रदेश में ‘अधिकार अभिलेख’, महाराष्ट्र में ‘सनद’, उत्तर प्रदेश में ‘घरौनी’ और उत्तराखंड में ‘स्वामित्व अभिलेख’। गाइडलाइन में सिर्फ़ इन छह राज्यों के नाम लिखे हैं।

PIB की 18 जनवरी 2025 की रिलीज़ के मुताबिक़ प्रधानमंत्री ने कहा था कि राज्य इसे अलग-अलग नामों से बुलाते हैं, जैसे घरौनी, अधिकार अभिलेख, प्रॉपर्टी कार्ड, मालमत्ता पत्रक और आवासीय भूमि पट्टा। उस रिलीज़ में नहीं लिखा कि कौन-सा नाम किस राज्य का है। PIB के उसी दिन के एक डॉक्यूमेंट में राजस्थान के एक व्यक्ति को ‘पट्टा और प्रॉपर्टी कार्ड’ मिलने की बात है।

यह कार्ड किसे मिलता है, और कहाँ अभी नहीं?

गाँव के आबादी वाले हिस्से में बने घर या प्लॉट के मालिक को, अगर उसके गाँव का इस योजना में सर्वे हुआ हो। गाइडलाइन के मुताबिक़ कार्ड सर्वे के नक़्शों के आधार पर दिए जाते हैं। उसी के मुताबिक़ मालिक को नाप-जोख और सर्वे में साथ देना होता है, और उसके पास जो काग़ज़ हों, वे दिखाने होते हैं।

गाइडलाइन के मुताबिक़ कार्ड ‘कब्ज़े’ के आधार पर दिए जाते हैं, सिर्फ़ विरासत के आधार पर नहीं, और राज्य कार्ड में एक से ज़्यादा मालिक लिख सकते हैं, ख़ासकर महिलाएँ साझा मालिक। लोकसभा में 17 मार्च 2026 को दिए जवाब के मुताबिक़ कुछ राज्यों ने ऐसा किया है, जैसे मध्य प्रदेश, हरियाणा, कर्नाटक, मिज़ोरम, छत्तीसगढ़, जम्मू-कश्मीर, पुडुचेरी, दमन-दीव और दादरा नगर हवेली।

कई राज्यों में अभी कार्ड नहीं बने। 4 अगस्त 2026 के जवाब की लिस्ट में 31 राज्य और केंद्रशासित प्रदेश हैं, और बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों का नाम उसमें नहीं है। उसी लिस्ट के मुताबिक़ अरुणाचल प्रदेश, असम, झारखंड, केरल, मणिपुर, सिक्किम, तमिलनाडु और तेलंगाना में तब तक एक भी कार्ड नहीं बना था।

3 फ़रवरी 2026 के लोकसभा जवाब के मुताबिक़ तमिलनाडु ने पायलट के 3 गाँवों से आगे यह योजना लागू न करने का फ़ैसला किया, क्योंकि वहाँ नत्थम (आबादी वाले इलाक़ों) के रिकॉर्ड पहले से हैं। आंध्र प्रदेश में कार्ड बने, पर 10 मार्च 2026 के जवाब के मुताबिक़ कार्ड का फ़ॉर्मेट बदलने की वजह से वहाँ एक भी कार्ड नहीं बँटा।

अपना कार्ड कैसे देखें, या उसकी कॉपी कैसे लें?

गाइडलाइन के मुताबिक़ कार्ड राज्य का राजस्व विभाग छापकर बाँटता है, इसलिए कॉपी का रास्ता भी राज्य ही तय करता है। PIB के 18 जनवरी 2025 के डॉक्यूमेंट के मुताबिक़ प्रॉपर्टी कार्ड DigiLocker ऐप में देखे और डाउनलोड किए जा सकते हैं। पर गाइडलाइन के मुताबिक़ कार्ड को DigiLocker से जोड़ना राज्य पर छोड़ा गया है। किन राज्यों के कार्ड DigiLocker पर आते हैं, इसकी कोई लिस्ट हमें 15 अक्टूबर 2026 की रात तक DigiLocker, PIB या योजना की वेबसाइट पर नहीं मिली।

उत्तर प्रदेश की 2020 की आबादी सर्वेक्षण नियमावली के मुताबिक़ घरौनी की कॉपी तहसील दफ़्तर या जन सुविधा केंद्र से मिलती है, राजस्व परिषद की तय फ़ीस देकर। नियमावली में कॉपी के लिए पोर्टल बनाने की बात भी है। यूपी की स्वामित्व वेबसाइट पर 14 अक्टूबर 2026 को हमें घरौनी खोजने का कोई पेज नहीं मिला। वहाँ हेल्पलाइन 7080100588 लिखी है, सोमवार से शुक्रवार, सुबह 9:30 से शाम 6 बजे तक; उस पेज पर ‘Last Updated’ 27 मई 2022 लिखा है।

दूसरे राज्यों में कॉपी के लिए अपनी तहसील, पटवारी, लेखपाल या तलाठी से पूछें।

कार्ड पर नाम या नाप ग़लत हो तो क्या करें?

कार्ड पक्का होने से पहले, जब कच्चा (ड्राफ़्ट) नक़्शा और रिकॉर्ड गाँव में रखा जाता है, उसी समय आपत्ति दें। लोकसभा में 11 अगस्त 2026 को दिए जवाब के मुताबिक़ राज्य सरकार ड्राफ़्ट नक़्शे छापती है, ताकि लोग राज्य के राजस्व क़ानून के हिसाब से दावे और आपत्तियाँ दे सकें। उसी जवाब के मुताबिक़ जहाँ राज्य के ज़िम्मेदार अधिकारी सर्वे में सच में तकनीकी कमी पाते हैं, वहाँ ज़रूरत हो तो ड्रोन दोबारा उड़ाकर सुधार किया जाता है।

गाइडलाइन के मुताबिक़ जाँच अधिकारी (Enquiry Officer) मालिक के नाम, सीमा या साझा हिस्से जैसी आपत्तियाँ सुनता है। उसके मुताबिक़ जो झगड़ा वहाँ न सुलझे, उसका आख़िरी फ़ैसला ज़िलाधिकारी या कलेक्टर करते हैं, या राज्य इसके लिए कोई और तरीक़ा तय करता है।

उत्तर प्रदेश में 2 जनवरी 2026 से उत्तर प्रदेश ग्रामीण आबादी अभिलेख अधिनियम, 2025 लागू है। उसकी धारा 9 और 10 के मुताबिक़ कच्ची घरौनी ग्राम सभा की खुली बैठक में सहायक अभिलेख अधिकारी, जो अधिनियम के मुताबिक़ आम तौर पर SDM होते हैं, छापते हैं, और घरौनी की किसी एंट्री से नाराज़ व्यक्ति अपने प्लॉट के सर्वे की ग़लती पर अभिलेख अधिकारी, यानी ज़िले के कलेक्टर, को ‘तय समय’ के अंदर आपत्ति देता है। वह समय नियमों में तय होना है; ऐसे नियम हमें 15 अक्टूबर 2026 की रात तक इंडिया कोड पर या यूपी की स्वामित्व वेबसाइट पर नहीं मिले।

अधिनियम की धारा 20 के मुताबिक़ 2020 की नियमावली से बनी घरौनियाँ अब इसी अधिनियम से बनी मानी जाती हैं। 2020 की आबादी सर्वेक्षण नियमावली में रास्ता यह लिखा है: नोटिस (फ़ॉर्म-8) मिलने के 15 दिन के अंदर आपत्ति फ़ॉर्म-9 पर SDM को देनी होती है, और SDM के आदेश से नाराज़ हों तो 15 दिन के अंदर कलेक्टर को। नियमावली में नोटिस के नमूने पर लिखा है कि तय समय में आपत्ति न आई, तो मान लिया जाएगा कि आपको कोई आपत्ति नहीं है।

अधिनियम के बाद भी यही 15-15 दिन चलेंगे या नहीं, यह हमें किसी सरकारी पेज पर नहीं मिला। इसलिए नोटिस में जिस अधिकारी का नाम और जितने दिन लिखे हों, वही मानें, और कच्ची घरौनी देखते ही लिखकर आपत्ति दें; सबसे छोटा समय जो हमें मिला, 15 दिन है। जिस प्लॉट पर झगड़ा रहे, उस पर ‘विवादित’ लिखा जाता है (अधिनियम की धारा 10, और नियमावली); नियमावली के मुताबिक़ बदलाव तब दर्ज होता है, जब पक्ष अदालत के आदेश की प्रमाणित कॉपी दें। नियमावली के मुताबिक़ नक़्शे की गिनती में छूटे प्लॉट को गाँव के आख़िरी प्लॉट नंबर के बाद का नंबर मिलता है।

हिमाचल प्रदेश में आबादी देह (रिकॉर्ड ऑफ़ राइट) क़ानून 2021 की धारा 11 के मुताबिक़ रिकॉर्ड गाँव में दिखाए जाने की तारीख़ से 30 दिन के अंदर सहायक अभिलेखन और समाधान अधिकारी को आपत्ति देनी होती है; 30 दिन में आपत्ति न आए, तो एंट्री पक्की मानी जाती है। 16 दिसंबर 2025 के लोकसभा जवाब में आपत्ति के लिए ‘60 दिन’ लिखा है, पर क़ानून में 60 दिन अधिकारी को आदेश देने के लिए हैं। इसलिए 30 दिन के अंदर आपत्ति दें। दूसरे राज्यों के नियम हमने नहीं पढ़े; वहाँ नोटिस में बताए समय के अंदर लिखकर आपत्ति दें, और कॉपी रखें।

कार्ड बनने के बाद रिकॉर्ड बदलना, गाइडलाइन के मुताबिक़, राज्य के राजस्व नियमों से होता है। उत्तर प्रदेश के अधिनियम के मुताबिक़ घरौनी में लिखने की ग़लती या छूटी एंट्री ठीक कराने, और फ़ोन नंबर या पता बदलवाने का आवेदन सहायक अभिलेख अधिकारी को जाता है (धारा 13); बिना झगड़े का नाम बदलना, जैसे विरासत या रजिस्टर्ड बिक्री के बाद, धारा 14 से होता है; झगड़ा हो तो पक्ष अदालत से राहत माँग सकते हैं (धारा 15)। आवेदन का तरीक़ा नियमों में तय होना है, जो हमें नहीं मिले; तहसील में पूछें।

कार्ड से क्या फ़ायदा होता है, और क्या नहीं?

योजना का एक बड़ा मक़सद यह है कि लोग घर के कार्ड पर बैंक से क़र्ज़ ले सकें, पर कार्ड होने भर से लोन पक्का नहीं होता। गाइडलाइन ख़ुद कहती है कि इसके लिए बैंकों का इस कार्ड को क़र्ज़ के लायक काग़ज़ मानना ज़रूरी है, और राज्यों को सुझाती है कि कार्ड के रिकॉर्ड में गिरवी (मॉर्गेज) दर्ज करने का इंतज़ाम हो। 4 अगस्त 2026 के जवाब के मुताबिक़ पंचायती राज मंत्रालय, वित्तीय सेवा विभाग और राज्यों के राजस्व विभाग मिलकर बैंकों में इन कार्डों को मनवाने पर काम कर रहे हैं, और ‘कुछ बैंकों’ ने इन पर लोन देना शुरू किया है।

उसी जवाब के मुताबिक़ तब तक 11,147 लोन दिए गए थे, कुल ₹1,713 करोड़ के; मंत्रालय की राज्यवार लिस्ट में इनमें से 8,808 राजस्थान के और 2,202 मध्य प्रदेश के थे, बाक़ी गुजरात, महाराष्ट्र, जम्मू-कश्मीर, मिज़ोरम और लद्दाख के। उत्तर प्रदेश, जहाँ सबसे ज़्यादा कार्ड बँटे हैं, इस लिस्ट में नहीं है। देश भर में बँटे कार्डों के मुक़ाबले यह हर 10,000 कार्ड पर करीब 4 लोन है; यह हिसाब हमारा है, और इसमें लोन 7 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के हैं, कार्ड सब राज्यों के। 11 अगस्त 2026 के जवाब के मुताबिक़ मंत्रालय यह गिनती नहीं रखता कि बैंकों ने कितने कार्ड क़र्ज़ के लिए नहीं माने।

खबरों में मध्य प्रदेश में स्वामित्व के अधिकार अभिलेखों की मुफ़्त रजिस्ट्री के एक अभियान की बात है। उसका कोई सरकारी आदेश हमें 15 अक्टूबर 2026 की रात तक mp.gov.in पर, या हमारी खोज में किसी .gov.in या .nic.in पेज पर नहीं मिला; राज्य की भू-अभिलेख वेबसाइट (mpbhulekh.gov.in) 14 अक्टूबर 2026 की शाम खुली ही नहीं। मध्य प्रदेश में अपने पटवारी या तहसील से पूछें।

विवाद घटने का दावा सरकारी जवाबों में है, पर इसे नापा नहीं गया। 21 जुलाई 2026 के लोकसभा जवाब में मंत्रालय ने कहा कि विवाद घटे या नहीं, इसका कोई आकलन (स्टडी) नहीं हुआ, और वह यह गिनती नहीं रखता कि योजना से पहले और बाद में कितने विवाद सुलझे।

गाइडलाइन के मुताबिक़ प्रॉपर्टी टैक्स तय करना भी योजना का एक मक़सद है। 21 जुलाई 2026 के जवाब में IIM अहमदाबाद की स्टडी के हवाले से बताया गया कि योजना के बाद ग्राम पंचायत का प्रॉपर्टी टैक्स और दूसरे लोकल टैक्स बढ़े। पर 11 अगस्त 2026 के एक और जवाब में मंत्रालय ने कहा कि पंचायत की अपनी कमाई या प्रॉपर्टी टैक्स पर उसने कोई स्टडी नहीं की, क्योंकि यह राज्य का विषय है। दोनों जवाब आपस में मेल नहीं खाते, इसलिए हमने दोनों लिखे हैं।

अब तक कितने कार्ड बने और बँटे?

4 अगस्त 2026 के लोकसभा जवाब के मुताबिक़ तब तक 3.24 करोड़ कार्ड बन चुके थे, और करीब 2.72 करोड़ बँट चुके थे। 21 जुलाई 2026 के जवाब की टेबल के मुताबिक़ ये कार्ड 1,97,186 गाँवों के लिए बने थे (3,24,16,278 कार्ड), और चुने (अधिसूचित) गए 3,38,722 गाँवों में से 3,30,854 में ड्रोन सर्वे हो चुका था।

उत्तर प्रदेश के बारे में 21 जुलाई 2026 के एक और जवाब के मुताबिक़ 13 जुलाई 2026 तक सभी 90,573 चुने गए गाँवों में ड्रोन सर्वे हो चुका था। करीब 75 हज़ार गाँवों के लिए 1.20 करोड़ घरौनी बन चुकी थीं, यानी करीब 83% गाँवों की। करीब 67 हज़ार गाँवों में 1.01 करोड़ घरौनी बँट चुकी थीं।

योजना की वेबसाइट के डैशबोर्ड पर, जिसे हमने 14 अक्टूबर 2026 को देखा और जिस पर ‘13-10-2026 की स्थिति’ लिखी थी, इससे कम गिनती है: 3,28,050 गाँवों में ड्रोन सर्वे, और 1,87,480 गाँवों के कार्ड। वेबसाइट के मुताबिक़ उसके आंकड़े ज़मीनी स्तर की एजेंसियाँ भरती हैं। इसलिए ऊपर हमने संसद में दी गई गिनती ली है।

16 दिसंबर 2025 के लोकसभा जवाब के मुताबिक़ योजना मार्च 2026 में पूरी होनी थी। 21 जुलाई 2026 के जवाब के मुताबिक़ इसे सितंबर 2026 तक बढ़ाया गया; वह तारीख़ निकल चुकी है। उसके बाद की कोई तारीख़ हमें 15 अक्टूबर 2026 की रात तक PIB, योजना की वेबसाइट या लोकसभा के जवाबों में नहीं मिली। गाँव का सर्वे बाक़ी हो, तो ग्राम पंचायत से पूछें।

स्वामित्व कार्ड के नाम पर ठगी से कैसे बचें?

कोई कॉल, मैसेज या ऐप ‘कार्ड जल्दी बनवाने’, ‘नाम जुड़वाने’ या ‘कार्ड पर लोन दिलाने’ के नाम पर पैसा, OTP, आधार या बैंक की जानकारी माँगे, तो न दें। आपत्ति और कॉपी का काम अपनी तहसील, पटवारी या लेखपाल के ज़रिए करें। DigiLocker सिर्फ़ उसकी सरकारी वेबसाइट या सरकारी ऐप से खोलें। साइबर ठगी हो जाए, तो 1930 पर फ़ोन करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत करें। स्कीम समाचार आपसे कोई जानकारी या पैसा नहीं माँगता।

स्वामित्व कार्ड के नाम पर ठगी की कोई अलग सरकारी चेतावनी हमें 15 अक्टूबर 2026 की रात तक PIB या योजना की वेबसाइट पर नहीं मिली। पर यूपी की नियमावली के मुताबिक़ कच्ची घरौनी का हिस्सा, नोटिस और आपत्ति का फ़ॉर्म लेखपाल मुफ़्त देता है, और कॉपी की फ़ीस राजस्व परिषद तय करती है।

ख़ुद कहाँ जाँचें?

इन सरकारी पेजों पर:

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